Karnataka vote Chori : कर्नाटक सरकार ने 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान कलबुर्गी जिले के आलंद विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। इस महत्वपूर्ण कदम के पीछे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस आरोप का सीधा प्रभाव है, जिसमें उन्होंने चुनाव में मतदाताओं की सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की बात कही थी।

राहुल गांधी के आरोप और आलंद विधायक की शिकायत
राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान आलंद निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूची से कई मतदाताओं के नाम बिना किसी वैध कारण के हटा दिए गए थे। उन्होंने यह भी दावा किया था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस मामले में निष्पक्षता नहीं दिखा रहे हैं और वोट चोरों को बचाने का काम कर रहे हैं।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, आलंद के विधायक बीआर पाटिल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उनकी शिकायत में बताया गया कि कुल 6,670 मतदाताओं के नाम 256 मतदान केंद्रों से अवैध रूप से हटाए गए हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
SIT का गठन और उसकी जिम्मेदारियां
कर्नाटक सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक एसआईटी गठित की है, जिसका नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (CID) करेंगे। इसके अलावा एसआईटी में पुलिस अधीक्षक स्तर के दो अधिकारी—सैदुलु अदावथ और शुभंविता भी शामिल हैं। इस टीम को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 2(यू) के तहत व्यापक अधिकार दिए गए हैं, जिससे वे पूरे राज्य में इस तरह के सभी संबंधित मामलों की गहन जांच कर सकें।
एसआईटी की जिम्मेदारी है कि वे तथ्यों की जांच कर सक्षम न्यायालयों को अपनी रिपोर्ट सौंपें। इसके साथ ही जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को भी भेजी जाएगी, जिससे आगे की कार्रवाई की जा सके।
जांच में सामने आए तथ्य
सरकारी आदेश में विधायक के हवाले से कहा गया है कि चुनाव अधिकारियों द्वारा किए गए सत्यापन में पता चला कि हटाए गए कुल 6,670 नामों में से 6,018 के लिए आवेदन प्रस्तुत किए गए थे। इनमें से केवल 24 आवेदन ही वैध पाए गए। बाकी 5,994 आवेदन कथित तौर पर अलग-अलग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर, मतदाताओं की जानकारी के बिना और दुर्भावनापूर्ण इरादे से दाखिल किए गए थे।
राजनीतिक हलचल और मतदाता विश्वास पर असर
आलंद विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से नाम हटाने के मामले ने राज्य की राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। यह मामला चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और लोकतंत्र के आधार स्तंभ यानी मतदाता अधिकारों को प्रभावित करता है। SIT की जांच इस बात का निर्धारण करेगी कि क्या वास्तव में मतदाता सूची में गड़बड़ी हुई है और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है।
कर्नाटक सरकार द्वारा गठित SIT की यह जांच विधानसभा चुनावों की निष्पक्षता की रक्षा के लिए अहम कदम है। यह जांच न केवल विवादित मतदाता सूची के मामलों को उजागर करेगी बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए भी मिसाल कायम करेगी। इस जांच से चुनावी प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने की उम्मीद की जा रही है, जिससे लोकतंत्र मजबूत होगा।
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