Keir Starmer India visit: अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाए जाने से भारत के लिए जहां एक ओर व्यापारिक मोर्चे पर दबाव बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर ब्रिटेन से आई खबर राहत देने वाली है। ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर दो दिवसीय भारत यात्रा पर हैं और बुधवार, 8 अक्टूबर को वे मुंबई पहुंचे। इस यात्रा के दौरान भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की उम्मीद की जा रही है।

अमेरिका से तनाव, ब्रिटेन से राहत
हाल ही में अमेरिका ने भारत के कुछ उत्पादों पर 50% तक टैरिफ लगा दिया, जिससे भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में खटास आई है। इसके विपरीत ब्रिटेन के साथ भारत का रिश्ता लगातार मजबूत हो रहा है। भारत-ब्रिटेन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार की राह आसान होगी और भारत के निर्यातकों को बड़ा फायदा मिलेगा।

स्टार्मर की यात्रा: क्या है एजेंडा?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की यह भारत यात्रा खास रणनीतिक एजेंडे के तहत हो रही है। दोनों देश 2030 तक आपसी व्यापार को दोगुना कर 120 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। इस समझौते में मुख्य रूप से कपड़ा, चमड़ा, एग्रीकल्चर प्रोडक्ट, फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर सिक्योरिटी जैसे सेक्टर शामिल हैं।
स्टार्मर गुरुवार, 9 अक्टूबर को मुंबई के राजभवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे जियो वर्ल्ड सेंटर में आयोजित सीईओ फोरम और ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 में हिस्सा लेंगे, जहां दोनों देशों के बिजनेस लीडर्स और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स के साथ चर्चा की जाएगी।
भारत को कैसे मिलेगा फायदा?
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निर्यात को मिलेगा बढ़ावा: FTA के तहत भारत से ब्रिटेन को जाने वाले उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क लगेगा, जिससे भारत के निर्यातकों को लाभ होगा।
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निवेश के नए अवसर: ब्रिटिश कंपनियां भारत में निवेश बढ़ा सकती हैं, जिससे रोजगार के मौके भी बनेंगे।
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टेक्नोलॉजी और इनोवेशन: फिनटेक, एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में भारत को ब्रिटेन के साथ मिलकर नई तकनीक तक पहुंच मिलेगी।
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सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी: अमेरिका से बढ़ते टकराव के बीच ब्रिटेन के साथ करीबी रिश्ते भारत की वैश्विक रणनीति को संतुलित बनाएंगे।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की यह भारत यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में नया मोड़ लाने वाली है। अमेरिका से व्यापारिक तनाव के बीच ब्रिटेन का यह समर्थन भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यदि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को सही तरीके से लागू किया जाए, तो आने वाले वर्षों में भारत को आर्थिक और रणनीतिक दोनों ही स्तरों पर इसका बड़ा फायदा मिल सकता है।










