Cabinet Meeting : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में 9 सितंबर 2025, दोपहर 3:30 बजे मंत्रालय (महानदी भवन), नवा रायपुर में राज्य मंत्री परिषद की पहली बैठक आयोजित होगी। यह बैठक इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद यह साय सरकार की पहली कैबिनेट बैठक होगी।

बैठक में सभी 14 मंत्री हिस्सा लेंगे और इसे आगामी प्रशासनिक निर्णयों और विकास योजनाओं की दिशा तय करने वाली अहम बैठक माना जा रहा है।

इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा
बैठक में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों पर चर्चा और निर्णय की संभावना है:
बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए राहत और पुनर्वास पैकेज:
बस्तर और अन्य हिस्सों में हालिया बाढ़ से भारी जन-धन की हानि हुई है। आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए सरकार द्वारा वित्तीय सहायता, पुनर्वास नीति और इंफ्रास्ट्रक्चर पुनर्निर्माण पर चर्चा हो सकती है।
राज्य के विकास कार्यों की प्राथमिकताएं:
सरकार अगले कुछ महीनों में किन योजनाओं को प्राथमिकता देगी, इसका खाका तैयार किया जा सकता है। इसमें सड़क, बिजली, पानी, डिजिटल कनेक्टिविटी और ग्रामीण विकास योजनाएं शामिल हो सकती हैं।
स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और औद्योगिक निवेश:
कैबिनेट में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, शिक्षा सुधार, किसान हितैषी योजनाएं और नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
विधानसभा सत्र की रणनीति:
आगामी विधानसभा सत्र को लेकर सरकार की विधान नीति, संभावित विधेयक और विपक्ष की रणनीति से निपटने की तैयारी पर भी मंत्रणा संभव है।
कैबिनेट विस्तार के बाद पहली बड़ी कार्रवाई
19 अगस्त को हुई पिछली कैबिनेट बैठक में सीमित एजेंडा रखा गया था, लेकिन इस बार मंत्रिमंडल का विस्तार हो चुका है। नए मंत्रियों को जिम्मेदारी मिल चुकी है, और यह बैठक उनके लिए विभागीय योजनाओं का रोडमैप प्रस्तुत करने का पहला मौका होगा।
सियासी नजरें भी टिकीं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक साय सरकार के कामकाज की प्राथमिकताओं का संकेत देगी। साथ ही, आने वाले चुनावी महीनों में भाजपा किस प्रकार राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाएगी, उसकी भी झलक इसमें दिख सकती है।
9 सितंबर की कैबिनेट बैठक केवल एक नियमित सरकारी बैठक नहीं, बल्कि साय सरकार के नीति निर्धारण और जन अपेक्षाओं पर खरा उतरने की दिशा में पहला बड़ा कदम मानी जा रही है। आम जनता और विपक्ष दोनों की निगाहें इस पर टिकी हैं कि सरकार किन योजनाओं और निर्णयों को अमल में लाती है।
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