CGPSC Scam: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में हुए भर्ती घोटाले की जांच के तहत CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों से स्पष्ट होता है कि यह घोटाला केवल सिस्टम में बैठे लोगों की मिलीभगत नहीं, बल्कि उनके परिजनों के सीधे लाभ से जुड़ा संगठित भ्रष्टाचार था।

कौन-कौन हुए गिरफ्तार?
CBI ने जिन 5 लोगों को शुक्रवार को गिरफ्तार किया है, उनमें शामिल हैं:
आरती वासनिक – पूर्व परीक्षा नियंत्रक, CGPSC

जीवनलाल ध्रुव – CGPSC के पूर्व सचिव और पूर्व IAS अधिकारी
सुमित ध्रुव – जीवनलाल ध्रुव का बेटा, वर्तमान में डिप्टी कलेक्टर
मीशा कोसले – पूर्व चेयरमैन के भाई की बहू, डिप्टी कलेक्टर

दीपा आदिल – पूर्व चेयरमैन की दूसरी बहू, जिला आबकारी अधिकारी
CBI ने इन सभी को विशेष कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह जांच अभी जारी है और अन्य संदिग्ध उम्मीदवारों की भूमिका की भी गहराई से जांच की जा रही है।
2020 से 2022 तक चला भर्ती घोटाला
CBI को यह जांच छत्तीसगढ़ सरकार की अधिसूचना के बाद 9 जुलाई 2024 को सौंपी गई थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि 2020 से 2022 के बीच CGPSC द्वारा आयोजित प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू राउंड में संगठित तरीके से अनियमितताएं और गड़बड़ियां की गईं। आरोप है कि तत्कालीन चेयरमैन, सचिव और परीक्षा नियंत्रक ने भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करके अपने रिश्तेदारों को चयनित कराया।
2021 की भर्ती प्रक्रिया में कुल 1,29,206 उम्मीदवारों ने प्रारंभिक परीक्षा दी थी, जिनमें से 2,548 उम्मीदवार मेन्स तक पहुंचे और अंत में 509 उम्मीदवार इंटरव्यू के लिए चयनित किए गए। अंतिम रूप से 170 उम्मीदवारों का चयन किया गया था, जिनमें कई संदिग्ध नामों की पहचान CBI ने की है।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
इससे पहले CBI ने इस मामले में CGPSC के तत्कालीन चेयरमैन, डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन, चार चयनित उम्मीदवारों और एक निजी व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया था। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
क्यों है यह मामला गंभीर?
यह घोटाला न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि उन हजारों योग्य उम्मीदवारों के सपनों को भी कुचलता है, जिन्होंने ईमानदारी से मेहनत करके परीक्षा दी थी। इस मामले ने CGPSC जैसी प्रतिष्ठित संस्था की साख को भी धक्का पहुंचाया है।
CBI की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि भ्रष्टाचार में शामिल उच्च पदस्थ अधिकारियों और उनके परिजनों को बख्शा नहीं जाएगा। जांच एजेंसी की सक्रियता से यह उम्मीद जगी है कि छत्तीसगढ़ में भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बहाल होगी और दोषियों को सख्त सजा मिलेगी।
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