CG Panchayat Employees Pension: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत कर्मचारियों की पेंशन से जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पेंशन पाने का कोई स्पष्ट वैधानिक अधिकार साबित नहीं कर सके। अदालत ने साफ किया कि पंचायत कर्मचारी सरकारी कर्मचारियों की श्रेणी में नहीं आते हैं और उनकी सेवा शर्तें अलग नियमों के तहत संचालित होती हैं।
अलग-अलग जनपद पंचायतों से रिटायर कर्मचारियों ने दायर की थीं याचिकाएं
यह मामला प्रदेश की विभिन्न जनपद पंचायतों से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों की ओर से दायर याचिकाओं से जुड़ा था। कर्मचारियों ने लंबे समय तक पंचायतों में सेवा देने का हवाला देते हुए पेंशन लाभ की मांग की थी। उनका तर्क था कि कई वर्षों तक सेवा करने के बावजूद उन्हें नियमित पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक राहत नहीं मिल पा रही।
दूसरे जनपद पंचायतों में पेंशन मिलने का दिया था तर्क
याचिकाकर्ताओं ने अदालत के सामने यह भी दलील रखी कि कुछ अन्य जनपद पंचायतों में कर्मचारियों को पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। ऐसे में समान परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी समान लाभ मिलना चाहिए। हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को पेंशन के वैधानिक अधिकार के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना। अदालत ने कहा कि किसी दूसरी पंचायत द्वारा लाभ दिए जाने मात्र से कानूनन पेंशन का अधिकार पैदा नहीं होता।
पंचायत राज अधिनियम की धारा 131 पर कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 131 का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि यह प्रावधान पहले से उपलब्ध वेतन, भत्ते और सेवानिवृत्ति लाभों को संरक्षण देता है। इस धारा के आधार पर कोई नया पेंशन अधिकार स्वतः नहीं बनाया जा सकता। इसलिए याचिकाकर्ताओं को अलग से पेंशन देने के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान होना जरूरी है।
कर्मचारियों के लिए प्रोविडेंट फंड योजना थी लागू
अदालत के अनुसार संबंधित पंचायत कर्मचारियों की सेवा शर्तों में सेवानिवृत्ति लाभ के लिए प्रोविडेंट फंड योजना का प्रावधान मौजूद था। कर्मचारी कंट्रीब्यूटरी प्रोविडेंट फंड का लाभ भी प्राप्त कर रहे थे। ऐसे में केवल लंबे समय तक सेवा करने के आधार पर अतिरिक्त पेंशन की मांग को स्वीकार करने का कोई वैधानिक आधार नहीं बनता। कोर्ट ने इसी पहलू को अपने फैसले में महत्वपूर्ण माना।
लंबे समय तक नौकरी करने से पेंशन अधिकार नहीं बनता
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी का लंबे समय तक सेवा में रहना अपने आप पेंशन पाने का कानूनी अधिकार नहीं देता। पेंशन अधिकार तभी हासिल हो सकता है, जब संबंधित कानून, नियम या सेवा शर्तों में उसका स्पष्ट प्रावधान मौजूद हो। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई ठोस वैधानिक प्रावधान सामने नहीं रख सके, जिसके आधार पर उनकी पेंशन की मांग स्वीकार की जा सके।
दूसरे कर्मचारियों के लाभ को आधार नहीं माना
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अन्य प्राधिकरण या जनपद पंचायत द्वारा कर्मचारियों को दिया गया लाभ समान वैधानिक अधिकार का आधार नहीं बन सकता। अलग-अलग संस्थाओं में यदि किसी स्तर पर पेंशन या अन्य लाभ दिया गया है, तो उसके आधार पर सभी कर्मचारियों के लिए स्वतः समान अधिकार निर्धारित नहीं किया जा सकता। संबंधित कानून और सेवा नियम ही पेंशन दावे की वैधता तय करेंगे।
सभी याचिकाएं खारिज, कर्मचारियों को लगा बड़ा झटका
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं में पर्याप्त मेरिट नहीं पाया और उन्हें खारिज कर दिया। हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ताओं पर किसी प्रकार की लागत लगाने का आदेश नहीं दिया। इस फैसले से उन सेवानिवृत्त पंचायत कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है, जो लंबे समय से पेंशन लाभ मिलने की उम्मीद कर रहे थे। फैसले से यह भी स्पष्ट हुआ कि पंचायत कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभ कानून और निर्धारित सेवा नियमों के आधार पर ही तय होंगे।
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