Criminal Cases Lawmakers : गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार होने वाले प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर अब पद गंवाने का खतरा मंडराने वाला है। केंद्र सरकार ने बुधवार को लोकसभा में एक अहम विधेयक पेश किया, जिसके तहत यदि कोई जनप्रतिनिधि 30 दिन से अधिक हिरासत में रहता है तो 31वें दिन स्वतः उसके पद से हट जाएगा। हालांकि, विपक्ष के हंगामे के बीच यह विधेयक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया गया है।

क्यों लाना पड़ा यह विधेयक?
अब तक किसी भी कानून में स्पष्ट प्रावधान नहीं था कि गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी के बाद लंबे समय तक हिरासत में रहने वाले पीएम, सीएम या मंत्री को कैसे हटाया जाए। इस खालीपन को भरने के लिए केंद्र सरकार ने तीन बड़े विधेयक पेश किए हैं…

केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025
संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025

इनका मकसद है कि अगर कोई जनप्रतिनिधि गंभीर अपराध के मामले में गिरफ्तार होकर 30 दिन से ज्यादा जेल या हिरासत में रहता है, तो उसे स्वचालित रूप से पद से हटाया जा सके।
किन नेताओं पर बढ़ेगा खतरा?
अगर यह कानून पास होता है तो उन सांसदों और मंत्रियों पर बड़ा असर पड़ेगा जिनके खिलाफ पहले से ही गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं या जो दोषी करार दिए जा चुके हैं।
उदाहरण के तौर पर…
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 6 महीने तक जेल में रहना पड़ा था। वे पद पर रहते हुए गिरफ्तार होने वाले पहले सीएम थे।
तमिलनाडु के मंत्री वी सेंथिल बालाजी 241 दिन तक हिरासत में रहे थे।
ऐसे मामलों में नया कानून लागू होने पर तत्काल पद गंवाना पड़ सकता है।
18वीं लोकसभा में कितने सांसद आपराधिक मामलों में घिरे?
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के मुताबिक, 18वीं लोकसभा के 543 में से 251 सांसदों (46%) पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 25 से अधिक दोषी भी ठहराए जा चुके हैं।
चुनाव दर चुनाव यह आंकड़ा बढ़ता गया है:
2004 → 125 सांसद (23%)
2009 → 162 सांसद (30%)
2014 → 185 सांसद (34%)
2019 → 233 सांसद (43%)
2024 → 251 सांसद (46%)
किस पार्टी के कितने आपराधिक छवि वाले सांसद?
भाजपा: 240 सांसदों में से 94 (39%) पर आपराधिक मामले
कांग्रेस: 99 में से 49 (49%)
सपा: 37 में से 21 (56%)
टीएमसी: 29 में से 13 (44%)
डीएमके: 22 में से 13 (59%)
टीडीपी: 16 में से 8 (50%)
शिवसेना: 7 में से 5 (71%)
गंभीर आपराधिक मामलों में आंकड़ा
भाजपा: 63 (26%)
कांग्रेस: 32 (32%)
सपा: 17 (46%)
टीएमसी: 7 (24%)
डीएमके: 6 (27%)
टीडीपी: 5 (31%)
शिवसेना: 4 (57%)
तीनों विधेयकों का सार
केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025: धारा 45 में संशोधन कर यह व्यवस्था की जाएगी कि गंभीर आपराधिक आरोपों में हिरासत में रहने वाले CM या मंत्री को हटाया जा सके।
संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025: अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में बदलाव कर यह प्रावधान होगा कि पीएम, केंद्रीय मंत्री, राज्यों और दिल्ली के CM या मंत्री गंभीर आपराधिक मामलों में पद से हटाए जा सकें। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025: धारा 54 में संशोधन कर वहां के CM और मंत्रियों को भी इसी नियम के दायरे में लाया जाएगा।
यह विधेयक भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। विपक्ष जहां इसे संविधान विरोधी बता रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि यह जनप्रतिनिधियों की साख बचाने और लोकतंत्र की गरिमा कायम रखने के लिए जरूरी है। अगर यह कानून लागू हो जाता है तो आने वाले समय में संसद और विधानसभाओं में अपराधी पृष्ठभूमि वाले नेताओं की संख्या में कमी आ सकती है।











