CG Bharat Mala Scam: छत्तीसगढ़ में रायपुर-विशाखापट्टनम नेशनल हाईवे से जुड़ी भारतमाला परियोजना के जमीन मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने आरोपी गांधी-तिवारी परिवार से जुड़े जयप्रकाश गांधी की करीब 12.78 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है। इसके साथ ही मामले में कुल 62 चल और अचल संपत्तियों को भी अटैच किया गया है।

जयप्रकाश गांधी की संपत्तियों पर ED ने कसा शिकंजा
मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान ED ने जयप्रकाश गांधी की संपत्तियों को चिन्हित किया था। कार्रवाई के तहत उनकी जमीन, अन्य अचल संपत्तियों के साथ-साथ शेयर और म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स को भी जब्ती में शामिल किया गया है।जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में आरोपी जयप्रकाश गांधी की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है। अब उनकी संपत्तियों पर कार्रवाई करते हुए ED ने आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े सबूतों के आधार पर यह कदम उठाया है।

14 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल
ED ने भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले में कुल 14 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दायर कर दी है। जांच में आरोप सामने आया है कि नोटिफिकेशन जारी होने के बाद जमीन की खरीद-फरोख्त कर अधिक मुआवजा हासिल करने की कोशिश की गई।फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और एजेंसी जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
मुआवजे की रकम से खरीदी गई संपत्तियां परिवार में बांटी गईं
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में सामने आया कि गांधी परिवार ने कथित तौर पर मुआवजे से प्राप्त रकम का इस्तेमाल जमीन और अन्य संपत्तियां खरीदने में किया। इसके बाद इन संपत्तियों को परिवार के सदस्यों के नाम रजिस्ट्री और गिफ्ट के माध्यम से हस्तांतरित किया गया।ED ने इस मामले में करीब 4.69 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर और म्यूचुअल फंड निवेश भी जब्त किए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि ये संपत्तियां कथित अवैध लेनदेन से जुड़ी हुई हैं।
छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर जमीन मुआवजे में हेरफेर का आरोप
भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में करीब 43 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मामला सामने आया था। आरोप है कि कुछ लोगों ने जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से अधिक मुआवजा प्राप्त करने का प्रयास किया।जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर एसडीएम, पटवारी और भू-माफिया के गठजोड़ के जरिए बैकडेट में दस्तावेज तैयार किए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर मुआवजे की राशि बढ़ाने का खेल किए जाने का आरोप है।

अधिकारियों पर भी हुई कार्रवाई, कई नाम जांच के दायरे में
मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई। रिपोर्टों के अनुसार, इस घोटाले से जुड़ी खबर प्रकाशित होने के बाद कोरबा के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को निलंबित किया गया था।इसके अलावा जगदलपुर नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त निर्भय साहू पर भी इसी मामले में कार्रवाई की गई थी। जांच रिपोर्ट तैयार होने के करीब छह महीने बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाया गया।
43 करोड़ रुपये से अधिक वित्तीय अनियमितता का आरोप
इस मामले में निर्भय कुमार साहू सहित पांच अधिकारी-कर्मचारियों पर 43 करोड़ 18 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
भारतमाला घोटाले की जांच अभी भी जारी
रायपुर-विशाखापट्टनम नेशनल हाईवे परियोजना से जुड़े इस मामले में ED लगातार जांच आगे बढ़ा रही है। एजेंसी जमीन खरीद, मुआवजा वितरण, संपत्तियों के हस्तांतरण और कथित अवैध धन के इस्तेमाल से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। आने वाले समय में इस मामले में और भी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
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