CG NSUI Appointment Cancelled : छत्तीसगढ़ NSUI में संगठनात्मक स्तर पर उठापटक की स्थिति सामने आई है। संगठन की ओर से 20 अगस्त को जारी किए गए नियुक्ति आदेश को महज 48 घंटे के भीतर रद्द कर दिया गया। इस आदेश के जरिए चार विधानसभा अध्यक्षों और पांच जिलाध्यक्षों समेत कुल नौ नए चेहरों को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। नियुक्तियां रद्द किए जाने के बाद NSUI के भीतर चल रही गतिविधियों को लेकर राजनीतिक और संगठनात्मक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
चार विधानसभा अध्यक्षों की हुई थी नियुक्ति
20 अगस्त को जारी आदेश में NSUI ने प्रदेश की चार विधानसभा इकाइयों के लिए नए अध्यक्ष नियुक्त किए थे। इनमें पाटन, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़ और कांकेर विधानसभा क्षेत्र शामिल थे। संगठन ने इन क्षेत्रों में नई जिम्मेदारी देकर स्थानीय स्तर पर गतिविधियों को मजबूत करने की कोशिश की थी। हालांकि, नियुक्ति के दो दिन के भीतर ही इन सभी आदेशों को वापस ले लिया गया।
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पांच जिलों में भी बदले गए थे अध्यक्ष
विधानसभा अध्यक्षों के साथ-साथ NSUI ने पांच जिलों में भी नए जिलाध्यक्षों की घोषणा की थी। इनमें मुंगेली, बालोद, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बिलासपुर ग्रामीण और बिलासपुर शहर शामिल थे। इन नियुक्तियों के जरिए संगठन ने जिला स्तर पर भी नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने का फैसला किया था। लेकिन अब इन सभी नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया है।
नौ नए चेहरों को मिली थी जिम्मेदारी
20 अगस्त के आदेश के जरिए कुल नौ कार्यकर्ताओं को NSUI संगठन में महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी मिली थी। चार नेताओं को विधानसभा अध्यक्ष और पांच नेताओं को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। कम समय में ही नियुक्तियां वापस लिए जाने से संगठन के भीतर फैसले को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, नियुक्तियां रद्द करने के पीछे का आधिकारिक कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं किया गया है।
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NSUI में संगठनात्मक स्थिति को लेकर चर्चा तेज
नियुक्तियों को जल्द रद्द किए जाने से छत्तीसगढ़ NSUI में सबकुछ सामान्य नहीं होने की चर्चा शुरू हो गई है। संगठन में पदों को लेकर पहले से चल रही गतिविधियों के बीच यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं की नजर अब इस बात पर है कि संबंधित पदों पर दोबारा नियुक्तियां कब की जाएंगी और नए नामों का चयन किस प्रक्रिया के तहत होगा।
पाटन से कांकेर तक नियुक्तियां हुई थीं
जिन विधानसभा इकाइयों में अध्यक्ष नियुक्त किए गए थे, उनमें प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का प्रतिनिधित्व शामिल था। पाटन, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़ और कांकेर जैसे क्षेत्रों में संगठन को नई जिम्मेदारियां दी गई थीं। इन नियुक्तियों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर छात्र राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों को गति देना माना जा रहा था। अब आदेश रद्द होने के बाद इन पदों पर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
बिलासपुर और अन्य जिलों में भी असर
NSUI के रद्द किए गए आदेश में बिलासपुर ग्रामीण और बिलासपुर शहर जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक क्षेत्रों के साथ मुंगेली, बालोद और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिलों को भी शामिल किया गया था। इन स्थानों पर जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को संगठन विस्तार की दृष्टि से अहम माना जा रहा था। नियुक्तियां रद्द होने के बाद स्थानीय स्तर पर भी नए आदेश का इंतजार किया जा रहा है।
नए आदेश का अब इंतजार
फिलहाल 20 अगस्त को जारी नियुक्तियों को रद्द किए जाने के बाद NSUI की अगली रणनीति पर सबकी नजर है। संगठन की ओर से इन पदों के लिए नए नाम घोषित किए जाएंगे या पुराने आदेश में किसी तरह का संशोधन होगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। वहीं, नियुक्तियों को इतनी जल्दी वापस लेने के फैसले को लेकर संगठन के भीतर और बाहर चर्चाओं का दौर जारी है।
48 घंटे का फैसला बना चर्चा का विषय
चार विधानसभा अध्यक्षों और पांच जिलाध्यक्षों की नियुक्ति महज 48 घंटे में रद्द होना छत्तीसगढ़ NSUI के लिए बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, इस फैसले के पीछे की वजह और आगे की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। अब संगठन के कार्यकर्ताओं की निगाह नए नियुक्ति आदेश और नेतृत्व के अगले फैसले पर टिकी हुई है।
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