CG School New Order: छत्तीसगढ़ के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले नन्हें बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त नया आदेश जारी किया है। हाल के दिनों में आवारा जानवरों से जुड़ी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए शासन ने यह कदम उठाया है। अब राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों में आवारा कुत्तों की स्थिति तथा सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पुख्ता इंतजामों की हर महीने की रिपोर्ट एसएएमआईएस (Stray Animal Monitoring and Information System) पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज करनी होगी।

अधिकारियों को पोर्टल पर देनी होगी पूरी जानकारी
लोक शिक्षण संचालनालय के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, सभी संबंधित अधिकारियों को यह बताना अनिवार्य होगा कि प्रत्येक स्कूल परिसर के अंदर या उसके आसपास कुल कितने आवारा कुत्ते घूम रहे हैं। इसके साथ ही यह भी जानकारी देनी होगी कि संबंधित स्कूल में बाउंड्रीवॉल और मुख्य गेट की पुख्ता व्यवस्था है या नहीं। यदि किसी स्कूल परिसर में लापरवाही बरती जाती है और वहां बाउंड्रीवॉल या गेट गायब मिलता है, तो इसके लिए सीधे तौर पर शिक्षा विभाग के स्थानीय अधिकारी ही जिम्मेदार माने जाएंगे।

जुलाई के अंत तक पोर्टल पर इंट्री अनिवार्य
शासन के निर्देशानुसार सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को यह सख्त हिदायत दी गई है कि वे इसी माह जुलाई के अंत तक हर हाल में अपनी आधिकारिक लॉगिन आईडी के जरिए ‘एसएएमआईएस’ पोर्टल पर सभी निर्धारित बिंदुओं की ऑनलाइन इंट्री सुनिश्चित करें। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह है कि उच्चाधिकारियों को मैदानी स्तर की वास्तविक स्थिति की पूरी जानकारी मिल सके, जिससे यह पता चल सके कि फील्ड में आवारा कुत्तों की निगरानी के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और किन-किन स्कूलों में तुरंत सुरक्षा इंतजामों की आवश्यकता है।
पोर्टल पर दर्ज किए जाने वाले मुख्य बिंदु
विभाग द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अधिकारियों को अपने जिलों के सभी शासकीय और निजी विद्यालयों का डेटा एकत्र कर पोर्टल पर फीड करना होगा। इसमें मुख्य रूप से यह बताना होगा कि कितने स्कूलों में कुत्तों से बचाव के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं तथा प्रवेश द्वार पर सावधानी से संबंधित नोटिस बोर्ड लगाए गए हैं या नहीं। इसके अलावा परिसरों की फेंसिंग, बाउंड्रीवॉल की स्थिति, प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड बॉक्स की उपलब्धता और छात्रों के लिए आयोजित जागरूकता सत्रों का पूरा विवरण भी देना होगा।
जागरूकता कार्यक्रम और हेल्पलाइन की अनिवार्यता
पोर्टल पर दर्ज होने वाले विवरण में यह भी शामिल है कि छात्रों और विद्यालय के कर्मचारियों के लिए आवारा कुत्तों के व्यवहार और बचाव से जुड़े कितने जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है, जिसमें कितने विद्यार्थियों ने भाग लिया। साथ ही, नगरीय प्रशासन विभाग की समर्पित हेल्पलाइन ‘निदान 1100’ के माध्यम से प्राप्त होने वाली शिकायतों और उन पर की गई त्वरित कार्रवाई का आंकड़ा भी देना होगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
इस नए आदेश का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस कड़े आदेश का मुख्य उद्देश्य स्कूल परिसरों में आवारा कुत्तों के प्रवेश को पूरी तरह से प्रतिबंधित करना और किसी भी आपात स्थिति या कुत्ते के काटने की दुर्घटना से बच्चों को सुरक्षित रखना है। शासन की मंशा बिल्कुल साफ है कि स्कूलों में अब किसी भी प्रकार की प्रशासनिक औपचारिकता नहीं चलेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे, जिसके लिए यह डिजिटल निगरानी तंत्र तैयार किया गया है।
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