CGPSC Paper Leak Case: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) राज्य सेवा परीक्षा-2021 कथित धांधली मामले में जेल में बंद पूर्व सचिव और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को बिलासपुर हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी करना बेहद गंभीर अपराध है, क्योंकि इससे केवल कुछ लोगों को नहीं बल्कि हजारों-लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ता है।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, पेपर लीक को बताया गंभीर अपराध
जस्टिस टामन दत्त गुरु की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान पेपर लीक मामले पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक करना हत्या जैसे अपराध से भी ज्यादा व्यापक प्रभाव डालने वाला अपराध है। न्यायालय के अनुसार, हत्या से एक परिवार प्रभावित होता है, लेकिन परीक्षा में भ्रष्टाचार होने से लाखों युवाओं की मेहनत, उम्मीद और पूरे समाज का सिस्टम पर विश्वास प्रभावित होता है।

कोर्ट ने इस स्थिति को “बाड़ ही खेत को खा गई” जैसी स्थिति बताते हुए कहा कि जिन अधिकारियों पर व्यवस्था की निष्पक्षता बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है, अगर वही नियमों का उल्लंघन करते हैं तो यह बेहद चिंताजनक है।
पूर्व सचिव पर बेटे को पेपर उपलब्ध कराने का आरोप
सीबीआई की जांच के अनुसार, जीवन किशोर ध्रुव पर अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि उन्होंने CGPSC राज्य सेवा परीक्षा-2021 की मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र पहले ही हासिल कर लिए थे।आरोप है कि इन प्रश्नपत्रों को उन्होंने अपने बेटे सुमित ध्रुव को उपलब्ध कराया, जिससे उसे परीक्षा में अनुचित लाभ मिला। जांच एजेंसी के मुताबिक, सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर पद के लिए हुआ था। सीबीआई ने इस पूरे मामले को परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता और निष्पक्षता से जुड़ा गंभीर अपराध बताया है।
सीबीआई को मिले कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और सबूत
सीबीआई ने जांच के दौरान भिलाई स्थित जीवन किशोर ध्रुव के घर की तलाशी ली थी। एजेंसी के अनुसार, इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए। जांच में मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र से जुड़े कई सवालों के उत्तर मिलने का दावा किया गया है।

सीबीआई का कहना है कि सामान्य अध्ययन के 47 सवालों में से 42 सवालों के उत्तर बरामद सामग्री में मिले। इसके अलावा निबंध परीक्षा के चार विषय ऐसे पाए गए, जिनकी तैयारी सुमित ध्रुव द्वारा परीक्षा से पहले की गई थी और वही विषय परीक्षा में पूछे गए।इन विषयों में क्रिप्टोकरेंसी, रूस-यूक्रेन युद्ध, दंतेवाड़ा जिले का विकास और छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम जैसे मुद्दे शामिल थे।
बचाव पक्ष ने कोर्ट में रखी अपनी दलील
जीवन किशोर ध्रुव की ओर से जमानत के पक्ष में कई तर्क दिए गए। उनके वकील ने कहा कि उनका नाम प्रारंभिक एफआईआर में शामिल नहीं था। उन्होंने यह भी दावा किया कि अधिकारी ने अपने बेटों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी पहले ही आयोग को दे दी थी और खुद को गोपनीय कार्यों से अलग कर लिया था।बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि जीवन किशोर ध्रुव सितंबर 2025 से जेल में बंद हैं और सीबीआई मामले में चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है। इसलिए उन्हें जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।
सीबीआई ने जमानत का किया विरोध
वहीं, सीबीआई ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जीवन किशोर ध्रुव आयोग में महत्वपूर्ण पद पर थे और परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी थी। जांच एजेंसी के अनुसार, उनके पद का इस्तेमाल कर प्रश्नपत्रों तक पहुंच बनाई गई और फिर उसे आगे साझा किया गया।सीबीआई ने कोर्ट में कहा कि बरामद दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और गवाहों के बयान आरोपी के खिलाफ आपराधिक साजिश की ओर इशारा करते हैं। एजेंसी ने दलील दी कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत देना उचित नहीं होगा।
जमानत खारिज होने से जांच को मिला बल
हाई कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद CGPSC धांधली मामले में जांच की दिशा को मजबूती मिली है। कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों को न्यायपालिका बेहद गंभीरता से देख रही है। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।
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