CG Bus News: छत्तीसगढ़ में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जरूरी सुरक्षा उपकरणों से संबंधित नियमों का पालन नहीं करने वाली 170 बसों के परमिट निरस्त कर उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। विभाग के अनुसार, इन बसों का संचालन परमिट के आधार पर राज्य के भीतर ही नहीं, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी नहीं किया जा सकेगा। यह कार्रवाई उन बस संचालकों के खिलाफ की गई है, जिन्होंने नोटिस जारी होने के बावजूद जरूरी सुधार नहीं किए।
जुलाई से सितंबर तक चली विशेष जांच में सामने आईं खामियां
परिवहन विभाग की जुलाई से सितंबर तक चली विशेष जांच के दौरान कई बसों में सुरक्षा उपकरणों की कमी पाई गई। जांच में 412 बसों में GPS यानी व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस नहीं मिला। वहीं, 210 बसों में GPS उपकरण बंद पाया गया। इसके अलावा, 85 बसों के पैनिक बटन भी काम नहीं कर रहे थे। इन खामियों को यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना गया। विभाग ने संबंधित संचालकों को नियमों का पालन करने और उपकरणों को दुरुस्त कराने के निर्देश दिए थे।
रायपुर से जगदलपुर तक बसों की जांच
निजी बसों में सुरक्षा उपकरणों की कमी को लेकर लगातार शिकायतें मिलने के बाद परिवहन विभाग ने जांच अभियान शुरू किया था। उड़नदस्ता टीमों और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों के अधिकारियों ने रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, जगदलपुर और अंबिकापुर समेत कई स्थानों पर बसों की जांच की। राष्ट्रीय राजमार्ग-53 पर भी वाहनों की पड़ताल की गई। इस दौरान GPS और पैनिक बटन से जुड़े नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए। जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि यात्री बसों में निर्धारित सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध हों और आपात स्थिति में मदद पहुंचाई जा सके।
नोटिस के बाद भी सुधार नहीं, 170 संचालकों पर गिरी गाज
विभाग ने पहले चरण में 300 बस संचालकों को 15 दिन का अंतिम नोटिस जारी किया था। इनमें से 140 संचालकों ने GPS लगवाकर उसका पंजीयन संबंधित पोर्टल पर करा लिया। लेकिन 170 बस मालिकों ने निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके बाद विभाग ने संबंधित बसों के परमिट निरस्त करने और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की। इस कदम का उद्देश्य बस संचालकों को सुरक्षा नियमों के प्रति जवाबदेह बनाना और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना है।
सड़क पर चलती मिलीं तो बसें होंगी जब्त
परमिट निरस्त होने के बाद संबंधित बसों का संचालन प्रतिबंधित है। यदि ये बसें सड़क पर चलती हुई पाई जाती हैं, तो इन्हें जब्त करने और जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जा सकती है। उप परिवहन आयुक्त केके पटेल के अनुसार, नियमों के उल्लंघन पर 10 हजार रुपये तक जुर्माने और छह महीने की सजा का प्रावधान भी है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि यात्रा के लिए बस चुनते समय सुरक्षा व्यवस्था और वाहन की वैधता पर ध्यान दें।
GPS और पैनिक बटन क्यों हैं जरूरी?
GPS उपकरण से बस की लोकेशन, निर्धारित मार्ग और संचालन पर निगरानी रखने में मदद मिलती है। वहीं, पैनिक बटन आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों के लिए उपयोगी सुरक्षा सुविधा है। बटन दबाने पर 112 सहित संबंधित नियंत्रण कक्ष तक सूचना पहुंचाने की व्यवस्था होती है। अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े वाहन मालिकों के लिए मोटर व्हीकल एक्ट और सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
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