ITBP Foundation Day : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 24 अक्टूबर को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के 65वें स्थापना दिवस के अवसर पर बल के सभी जवानों और अधिकारियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात हिमवीरों के साहस, समर्पण और निस्वार्थ सेवा की प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि ITBP के जवान कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। उनका त्याग और बलिदान देशवासियों के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत है।
सोशल मीडिया पोस्ट में हिमवीरों के जज्बे को किया सलाम
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया। इस पोस्ट में बर्फ से ढकी पहाड़ियों पर तैनात ITBP जवानों की तस्वीरें भी दिखाई गईं। प्रधानमंत्री ने स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि बल के हिमवीरों ने अपने असाधारण साहस और दृढ़ता से अलग पहचान बनाई है। उन्होंने जवानों की निस्वार्थ सेवा को देश के लिए गौरव का विषय बताया। यह संदेश उन सुरक्षाकर्मियों के योगदान को रेखांकित करता है, जो दुर्गम इलाकों में रहकर देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं।
हर चुनौती का दृढ़ संकल्प के साथ सामना करते हैं हिमवीर
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में ITBP के जवानों की कठिन परिस्थितियों में काम करने की क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमवीर हर चुनौती का सामना अद्भुत दृढ़ संकल्प के साथ करते हैं। बर्फीले पहाड़ों, कम तापमान और दुर्गम रास्तों के बीच ड्यूटी निभाना आसान नहीं होता। इसके बावजूद जवान सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्क रहते हैं। उनका अनुशासन, साहस और कर्तव्यनिष्ठा देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
24 अक्टूबर 1962 को हुआ था ITBP का गठन
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस का गठन 24 अक्टूबर 1962 को किया गया था। यह बल भारत और चीन के बीच लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा में अहम जिम्मेदारी निभाता है। यह सीमा लद्दाख के काराकोरम दर्रे से शुरू होकर अरुणाचल प्रदेश के जाचेप ला तक फैली है। सीमावर्ती इलाकों में निगरानी रखने के साथ-साथ ITBP के जवान विभिन्न आंतरिक सुरक्षा अभियानों में भी योगदान देते हैं। छत्तीसगढ़ जैसे क्षेत्रों में नक्सल-विरोधी अभियानों के दौरान भी इस बल की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
18,800 फीट तक की ऊंचाई पर तैनात रहते हैं जवान
ITBP की कई सीमा चौकियां समुद्र तल से 9,000 से 18,800 फीट तक की ऊंचाई पर स्थित हैं। इन इलाकों में सर्दियों के दौरान तापमान माइनस 45 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। अत्यधिक ठंड, बर्फबारी और ऑक्सीजन की कमी जैसी चुनौतियों के बीच भी जवान चौकसी बनाए रखते हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में लगातार निगरानी करना बल के जवानों की शारीरिक क्षमता, प्रशिक्षण और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा लेता है।
आपदा राहत और बचाव अभियानों में भी अहम भूमिका
सीमा सुरक्षा के अलावा ITBP पर्वतारोहण, स्कीइंग और सामरिक युद्ध का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त बल है। इसके जवान हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्यों में भी हिस्सा लेते हैं। भूस्खलन, बर्फबारी और अन्य आपात परिस्थितियों में फंसे लोगों तक सहायता पहुंचाना इसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है। इस तरह ITBP न केवल देश की सीमाओं की सुरक्षा करता है, बल्कि जरूरत के समय नागरिकों की मदद के लिए भी तैयार रहता है।
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