BCC vs PCC Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों ‘कांग्रेस के भीतर कांग्रेस’ की चर्चा गर्म है। भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा के तंज से शुरू हुई बयानबाज़ी अब एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे रही है। मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में एक नहीं दो कांग्रेस कमेटियां चल रही हैं – एक ‘भूपेश कांग्रेस कमेटी’ और दूसरी ‘बैज कांग्रेस कमेटी’, जिसे लेकर अब कांग्रेस के भीतर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।

भाजपा का आरोप: कांग्रेस में कन्फ्यूजन और व्यक्तिवाद
भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा“यहां कौन सी कांग्रेस है, मुझे समझ नहीं आता। प्रदेश कांग्रेस कमेटी है और दो BCC हैं – एक भूपेश कांग्रेस और दूसरी बैज कांग्रेस। यही कारण है कि कांग्रेस में भ्रम है। कभी EVM की बात करते हैं, कभी वोट चोरी की।” उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को व्यक्तिवाद से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद और लोकतंत्र की बात करनी चाहिए, तभी वह मजबूत विपक्ष बन सकेगी।

कांग्रेस का पलटवार: भाजपा पहले अपना ‘फूफा यूनियन’ संभाले
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने भाजपा नेताओं को करारा जवाब देते हुए कहा, “भाजपा नेता दूसरों के घर झांकने से पहले अपने घर देखें। उनके यहां ‘फूफा यूनियन’ बन गया है, पहले उसे संभालें।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाजपा के नेताओं को यह तय करने का कोई अधिकार नहीं कि कांग्रेस किसके नेतृत्व में चले। कांग्रेस सामूहिक नेतृत्व में विश्वास रखती है।
रविंद्र चौबे का बयान और उसके बाद की सफाई
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रविंद्र चौबे ने हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन्मदिन पर कहा था कि “जनता चाहती है कि भूपेश बघेल कांग्रेस का नेतृत्व करें। आने वाले चुनाव में भी वही नेतृत्व करें।” इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा छिड़ गई कि क्या कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर मतभेद हैं?
हालांकि, विवाद बढ़ता देख चौबे ने सफाई दी “मेरा आशय 2018 की परिस्थिति के संदर्भ में था, जहां भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव और चरणदास महंत के आक्रामक नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता में आई थी। आज भी पार्टी सामूहिक नेतृत्व में काम कर रही है।”
PCC अध्यक्ष दीपक बैज बोले – “सबका समर्थन मेरे साथ”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने साफ किया कि “रविंद्र चौबे वरिष्ठ और अनुभवशील नेता हैं। मीडिया में जो बातें फैलाई जा रही हैं, वे भ्रामक हैं। मुझे पूरी कांग्रेस और कार्यकर्ताओं का समर्थन प्राप्त है। भाजपा के कुशासन के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी है।”
क्या सच में कांग्रेस दो हिस्सों में बंटी है?
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में जारी इस बयानबाज़ी से यह स्पष्ट है कि पार्टी के भीतर कई चेहरे हैं, लेकिन नेतृत्व को लेकर आधिकारिक रूप से कोई मतभेद सामने नहीं आया है। भाजपा जहां अंदरूनी असंतुलन को मुद्दा बना रही है, वहीं कांग्रेस नेतृत्व इसे “सामूहिक नेतृत्व और टीम वर्क” का नाम दे रही है।
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