Chhattisgarh DA News : छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के बीच महंगाई भत्ते (DA) को लेकर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रदेश के सभी शासकीय सेवकों के लिए महंगाई भत्ते की एक समान व्यवस्था लागू होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप करने की अपील की है। फेडरेशन का तर्क है कि प्रदेश के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में उनके आर्थिक हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
महंगाई सभी पर समान, फिर डीए में अलग व्यवस्था क्यों?
कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन का कहना है कि महंगाई का असर किसी कर्मचारी के पद, विभाग या संवर्ग के आधार पर अलग-अलग नहीं होता। बाजार में खाद्य सामग्री, जरूरी वस्तुओं और घरेलू खर्चों की बढ़ती कीमतें सभी परिवारों को प्रभावित करती हैं। इसके बावजूद महंगाई भत्ते के भुगतान में अलग-अलग आदेश और समय-सीमा अपनाए जाने पर कर्मचारियों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को जिस तारीख से डीए देय होता है, उसी तारीख से छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।

केंद्र और मध्यप्रदेश की व्यवस्था से तुलना
फेडरेशन ने केंद्र सरकार और पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश की डीए व्यवस्था का हवाला देते हुए छत्तीसगढ़ में भी समान नीति लागू करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि मध्यप्रदेश से अलग होकर बने छत्तीसगढ़ में कई प्रशासनिक और सेवा संबंधी नियमों में समानता होनी चाहिए। कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, मध्यप्रदेश में देय तिथि से डीए का लाभ मिलने की व्यवस्था की तुलना में छत्तीसगढ़ में अलग-अलग समय पर आदेश जारी होने से असंतोष बढ़ रहा है।





चुनावी उम्मीदों के बाद भी फैसले का इंतजार
छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ते के मामले में राहत मिलने की उम्मीद थी। विधानसभा चुनाव के दौरान ‘मोदी की गारंटी’ से भी कर्मचारियों की अपेक्षाएं बढ़ी थीं। फेडरेशन का कहना है कि सरकार के कार्यकाल में अब तक केंद्र के समान देय तिथि से डीए देने को लेकर स्पष्ट और स्थायी निर्णय नहीं हुआ है। इसी वजह से कर्मचारियों के बीच नाराजगी बनी हुई है। संगठन चाहता है कि सरकार इस विषय पर जल्द ठोस फैसला ले।
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को सौंपा गया मांग पत्र
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अपनी मांगें रखी हैं। संगठन ने प्रदेश में ‘एक राज्य, एक समान डीए’ की नीति लागू करने की अपील की है। इसके साथ ही जुलाई 2026 से लंबित 3 प्रतिशत महंगाई भत्ते का आदेश जारी करने की मांग की गई है। फेडरेशन ने जनवरी 2026 से स्वीकृत 2 प्रतिशत डीए के आदेश में भी संशोधन करने की बात कही है, ताकि भुगतान की व्यवस्था स्पष्ट हो सके।
एरियर्स की पूरी राशि GPF खाते में समायोजित करने की मांग
फेडरेशन ने महंगाई भत्ते के एरियर्स का भुगतान करने के बजाय उसकी संपूर्ण राशि कर्मचारियों के जीपीएफ खातों में समायोजित करने की मांग भी उठाई है। संगठन चाहता है कि भविष्य में केंद्र सरकार के साथ ही राज्य कर्मचारियों के लिए भी महंगाई भत्ते की स्वीकृति और भुगतान की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए। इससे बार-बार अलग-अलग आदेशों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और कर्मचारियों को आर्थिक लाभ समय पर मिल सकेगा।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन की चेतावनी
फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि दीपावली से पहले लंबित डीए और एरियर्स से संबंधित मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। कर्मचारियों का कहना है कि वे सरकार से कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं मांग रहे, बल्कि केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ते का लाभ चाहते हैं।
सरकार के फैसले पर टिकी कर्मचारियों और पेंशनरों की नजर
अब प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर है। फेडरेशन को उम्मीद है कि सरकार उनकी आर्थिक चिंताओं को समझते हुए दीपावली के अवसर पर सकारात्मक निर्णय लेगी। हालांकि, मांगों पर सरकार की ओर से अंतिम फैसला आने तक डीए की एक समान व्यवस्था और एरियर्स भुगतान का मुद्दा कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बना रहेगा।
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