Kharif Crops Incentive : छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, अब अन्य खरीफ फसलों पर मिलेगी ₹15,000 प्रोत्साहन राशि

Kharif Crops Incentive : छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने प्रदेश के अन्नदाताओं की आमदनी बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को अधिक व्यावहारिक व मुनाफेदार बनाने की दिशा में एक बेहद ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया है. राज्य मंत्रिपरिषद की हालिया बैठक में खरीफ सीजन 2026 से ‘कृषक उन्नति योजना’ के एक बिल्कुल नए और संवर्धित स्वरूप को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है. इस नई नीति के अंतर्गत, जो किसान पारंपरिक रूप से उगाई जाने वाली धान की फसल के स्थान पर अन्य वैकल्पिक खरीफ फसलों की खेती का विकल्प चुनेंगे, उन्हें राज्य सरकार द्वारा प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की भारी-भरकम वित्तीय प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी.

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सरकार का दृढ़ विश्वास है कि इस कल्याणकारी कदम से छत्तीसगढ़ में फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा, जिससे किसान केवल धान की खेती पर निर्भर रहने के बजाय अन्य अधिक मुनाफे वाली नकदी फसलों की तरफ आकर्षित होंगे. यह निर्णय विशेष रूप से उन मैदानी और आदिवासी अंचलों के लिए मील का पत्थर साबित होगा, जहां दशकों से केवल धान की एकल फसल प्रणाली का चलन रहा है.

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इन चुनिंदा वैकल्पिक और मोटे अनाजों की खेती करने पर मिलेगा सीधा वित्तीय लाभ

राज्य सरकार द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइन और व्यवस्था के अनुसार, इस विशेष प्रोत्साहन योजना का लाभ उठाने के लिए फसलों का दायरा तय कर दिया गया है. इसके तहत दलहन (दालें), तिलहन (तेल निकालने वाली फसलें), मक्का, कोदो, कुटकी, रागी (मिलेट्स या मोटे अनाज) और कपास जैसी महत्वपूर्ण फसलों की बुआई करने वाले किसानों को सीधे तौर पर इस आर्थिक सहायता का हकदार माना जाएगा. छत्तीसगढ़ सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के कृषि मानचित्र पर इन वैकल्पिक और पोषक तत्वों से भरपूर फसलों के रकबे (क्षेत्रफल) को तेजी से बढ़ाना है, ताकि राज्य का पूरा कृषि क्षेत्र पर्यावरण और बाजार की दृष्टि से अधिक संतुलित, विविधतापूर्ण और टिकाऊ (Sustainable) बन सके.

कृषि विशेषज्ञों का नजरिया

कृषि वैज्ञानिकों और आर्थिक विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए इसे दूरदर्शी बताया है. विशेषज्ञों का मानना है कि दलहन और तिलहन जैसी फसलें न केवल खुले बाजार में किसानों को बहुत बेहतर और स्थिर मूल्य दिला सकती हैं, बल्कि हवा से नाइट्रोजन सोखकर मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता (Fertility) को बनाए रखने में भी बेहद मददगार साबित होती हैं. इसके अतिरिक्त, कोदो, कुटकी और रागी जैसे पोषक मोटे अनाजों (मिलेट्स) को बढ़ावा देने से न सिर्फ ग्रामीण इलाकों में पोषण सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि कम पानी की खपत होने के कारण भूजल स्तर के संरक्षण जैसे गंभीर पर्यावरणीय मोर्चों पर भी इसके बेहद सकारात्मक और दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे.

बहुआयामी बनाने पर सरकार का फोकस

वर्तमान में छत्तीसगढ़ की एक बहुत बड़ी आबादी पूरी तरह से केवल धान के उत्पादन पर ही आश्रित है. ऐसी स्थिति में, यदि कभी बाजार में मंदी आती है, मौसम की मार पड़ती है या कीटों के प्रकोप से उत्पादन प्रभावित होता है, तो उसका सीधा और गहरा असर गरीब किसानों की घरेलू आय पर पड़ता है. सरकार का मानना है कि कृषक उन्नति योजना का यह नया ढांचा किसानों को ऐसे अप्रत्याशित आर्थिक संकटों से सुरक्षा प्रदान करेगा. फसल विविधीकरण के माध्यम से किसानों के पास आय के नए और सुरक्षित विकल्प मौजूद होंगे, जिससे कृषि क्षेत्र में निहित आर्थिक जोखिम काफी हद तक कम हो जाएगा. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसान व्यवस्थित ढंग से मक्का और कपास जैसी व्यावसायिक फसलों की ओर रुख करते हैं, तो उनकी आय दोगुनी होने की संभावना प्रबल हो जाएगी.

पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल व्यवस्था

इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने तकनीक का सहारा लिया है और स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया शत-प्रतिशत डिजिटल और पारदर्शी होगी. योजना का लाभ देने के लिए राज्य के ‘एकीकृत किसान पोर्टल’, ‘एग्रीस्टेक पंजीयन’ (AgriStack) और अत्याधुनिक ‘डिजिटल क्रॉप सर्वे’ (Digital Crop Survey) को मुख्य तकनीकी आधार बनाया गया है. इस आधुनिक व्यवस्था से वास्तविक और पात्र किसानों की पहचान बेहद सटीक और पारदर्शी तरीके से की जा सकेगी. सबसे बड़ी बात यह है कि सहायता राशि बिना किसी बिचौलिए के सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ‘डीबीटी’ (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से ट्रांसफर की जाएगी.

तकनीकी सत्यापन से फर्जी दावों पर लगेगी लगाम

प्रशासन का मानना है कि इस सैटेलाइट और तकनीक आधारित सत्यापन मॉडल के लागू होने से कृषि योजनाओं में होने वाले फर्जीवाड़े और गलत दावों पर पूरी तरह से लगाम लग जाएगी. इससे केवल वास्तविक पसीना बहाने वाले किसानों को ही समय पर उनकी मेहनत का प्रतिफल मिल सकेगा, जिससे सरकारी तंत्र की कार्यकुशलता भी बढ़ेगी. कुल मिलाकर, यह नीतिगत निर्णय छत्तीसगढ़ की पूरी कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया और समृद्ध मोड़ देने की क्षमता रखता है. जब राज्य में बड़े पैमाने पर दलहन-तिलहन का उत्पादन बढ़ेगा, तो बाजार में विविधता आएगी, पानी का विवेकपूर्ण उपयोग होगा और छत्तीसगढ़ टिकाऊ कृषि विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ सकेगा.

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Chandan Das

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