Raipur Avanti Vihar Park : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के वीआईपी इलाके अवंति विहार सेक्टर-2 से एक बड़ा विवाद सामने आया है. यहां पार्क और गार्डन के लिए आरक्षित सरकारी जमीन पर लगातार हो रहे अवैध कब्जे और नए निर्माण कार्यों को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है. कॉलोनी के आक्रोशित रहवासियों ने इस मामले की लिखित शिकायत रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे से की है. नागरिकों का साफ आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों और स्थानीय समिति द्वारा नगर निगम प्रशासन और स्वयं महापौर को पूरी तरह अंधेरे में रखा गया है. उन्हें गुमराह कर और गलत जानकारी देकर इस आरक्षित जमीन पर नए विकास कार्यों की घोषणाएं करवा ली गईं, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है.

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा अतिक्रमण
स्थानीय निवासियों ने शिकायत पत्र में सीधे तौर पर ‘श्री श्री दुर्गा सेवा समिति’ पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि दुर्गा मैदान की जिस आरक्षित जमीन पर पहले से ही समिति द्वारा अवैध निर्माण किया गया है, अब वहां नगर निगम के फंड से और नए निर्माण कार्यों को मंजूरी दी जा रही है. रहवासियों ने देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के पुराने आदेशों का कड़ा हवाला देते हुए इन सभी अवैध निर्माण कार्यों पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है. नागरिकों का कहना है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने जिस जमीन को ले-आउट में पार्क और ‘ओपन स्पेस’ (खुली जगह) के रूप में आरक्षित किया था, भू-माफिया और रसूखदार लोग मिलकर उसका मूल स्वरूप लगातार नष्ट कर रहे हैं.

दो सालों से चल रहा है यह विवाद
कॉलोनी वासियों के अनुसार, पार्क की इस जमीन को लेकर चल रहा यह विवाद कोई नया नहीं है. इससे पहले साल 2023 में भी उन्होंने दुर्गा मैदान में हो रहे अवैध पक्के निर्माण और अतिक्रमण को लेकर नगर निगम प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से लिखित शिकायत की थी. लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण दो साल बीत जाने के बाद भी जमीनी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया. कॉलोनी के वरिष्ठ निवासी एसके जाधव ने बताया कि शुरुआत में यहां केवल एक छोटा सा मंच (स्टेज) बनाया गया था, लेकिन अब वहां बड़े पैमाने पर लोहे और कंक्रीट का शेड निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइन बहुत स्पष्ट है कि आवासीय कॉलोनियों के पार्कों में किसी भी तरह के अवैध कब्जे को तुरंत ध्वस्त किया जाना चाहिए.
महापौर को अंधेरे में रखकर कराया गया उद्घाटन
एक अन्य स्थानीय नागरिक परेश कुमार बानी ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इस निर्माण कार्य से जुड़ी घोषणा और शिलान्यास कार्यक्रम की कोई भी भनक कॉलोनी वासियों को नहीं लगने दी गई. महापौर मीनल चौबे को पूरी तरह गुमराह करके और अंधेरे में रखकर इस निर्माण कार्य का उद्घाटन करवा लिया गया. जब यह कार्यक्रम हो रहा था, तब कॉलोनी के किसी भी वास्तविक या पंजीकृत निवासी को इसकी सूचना तक नहीं दी गई थी. रहवासियों का कहना है कि अवंति विहार सेक्टर-2 में पहले से ही बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने के लिए पर्याप्त सार्वजनिक पार्कों और सुविधाओं का भारी अभाव है. ऐसे में बची हुई पार्क की एकमात्र जमीन पर भी कंक्रीट का ढांचा खड़ा होने से आम जनता की परेशानियां काफी ज्यादा बढ़ रही हैं.
हाईकोर्ट के कड़े फैसलों का उल्लंघन होने का दावा
महापौर को सौंपे गए अपने विस्तृत ज्ञापन में रहवासियों ने कानूनी पहलुओं को मजबूती से सामने रखा है. उन्होंने देश के सुप्रीम कोर्ट द्वारा साल 2009 में दिए गए उस ऐतिहासिक आदेश का विशेष रूप से उल्लेख किया है, जिसमें सार्वजनिक पार्कों, सड़कों और ओपन स्पेस पर किसी भी तरह के नए धार्मिक या निजी निर्माणों की अनुमति नहीं देने की बात कही गई थी. इसके साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के भी एक महत्वपूर्ण फैसले का हवाला दिया, जिसके अनुसार सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित सरकारी जमीन का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में किसी अन्य व्यावसायिक या निजी उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता. नागरिकों का कहना है कि इस अवैध निर्माण पर खर्च की जा रही सरकारी राशि का उपयोग वास्तव में वहां सुंदर गार्डन, ओपन जिम और बच्चों के लिए झूले विकसित करने में किया जाना चाहिए.

निगम की कार्रवाई पर टिकीं नजरें
स्थानीय जनता की इस गंभीर और बिंदुवार शिकायत को सुनने के बाद महापौर मीनल चौबे ने मामले को गंभीरता से लिया है. उन्होंने पीड़ित रहवासियों को आश्वस्त किया है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के मूल ले-आउट के नियमों के अनुसार ही आगे की विधिक कार्रवाई सुनिश्चित होगी. महापौर के इस जांच के आश्वासन के बाद अब कॉलोनी के सभी लोगों की नजरें नगर निगम और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं. स्थानीय नागरिकों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम प्रशासन ने इस अवैध निर्माण को तुरंत मलबे में तब्दील नहीं किया और पार्क की जमीन को कब्जामुक्त नहीं कराया, तो वे आने वाले दिनों में सड़क पर उतरकर उग्र विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे.












