Chhattisgarh Land Use New Rules : छत्तीसगढ़ सरकार ने कारोबार सुगमता बढ़ाने और भूमि उपयोग से जुड़े नियमों को सरल बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन किया है। यह बदलाव केंद्र सरकार की नियमन प्रक्रिया को आसान बनाने और कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ कम करने की पहल के अनुरूप किया गया है। नई व्यवस्था के तहत भूमि उपयोग के लिए Negative List Model लागू किया गया है। इससे विभिन्न भूमि श्रेणियों में अनुमत्य गतिविधियों का दायरा बढ़ेगा और बदलती जरूरतों के अनुसार जमीन का उपयोग करना अधिक व्यावहारिक हो सकेगा।
Negative List Model से नियमों में मिलेगा लचीलापन
संशोधित नियमों में भूमि उपयोग की अलग-अलग श्रेणियों के लिए Negative List आधारित व्यवस्था अपनाई गई है। इस मॉडल के तहत प्रत्येक श्रेणी में केवल उन गतिविधियों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध किया जाएगा, जिन्हें वहां अनुमति नहीं होगी या जो उस उपयोग के अनुकूल नहीं मानी जाएंगी। अन्य गतिविधियों के लिए अपेक्षाकृत व्यापक गुंजाइश उपलब्ध होगी। इससे जमीन के उपयोग से जुड़े निर्णयों में लचीलापन आएगा और नई आर्थिक गतिविधियों को जगह मिल सकेगी। सरकार की इस पहल का उद्देश्य नियोजन प्रक्रिया को सरल बनाना और अनावश्यक नियामकीय बाधाओं को कम करना है।
केंद्र के सुधारों के अनुरूप राज्य की पहल
भूमि उपयोग नियमों में संशोधन को केंद्र सरकार की नियमन सरलता और शहरी नियोजन सुधारों से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे पहले भी छत्तीसगढ़ में शहरी विकास और कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए कई सुधार लागू किए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना (SASCI) के तहत छत्तीसगढ़ को वित्त वर्ष 2024-25 में 800 करोड़ रुपये और 2025-26 में 85 करोड़ रुपये की सहायता मिली थी। इन सुधारों का उद्देश्य राज्य में विकास परियोजनाओं और आर्थिक गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।
कई राज्यों में लागू है Negative List मॉडल
भूमि उपयोग और विकास नियंत्रण नियमों को सरल बनाने के लिए अन्य राज्यों में भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाई गई है। त्रिपुरा, मध्यप्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों ने अपने विकास नियंत्रण विनियमों (DCR) में Negative List मॉडल का उपयोग किया है। छत्तीसगढ़ ने भी अब इस दिशा में कदम बढ़ाया है। इस व्यवस्था से भूमि उपयोग की अनुमतियों को अधिक स्पष्ट बनाने और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है।
आवासीय क्षेत्रों में Mixed Use को बढ़ावा
संशोधित नियमों का एक प्रमुख उद्देश्य मिश्रित भूमि उपयोग यानी Mixed Use को बढ़ावा देना है। इसके तहत आवासीय क्षेत्रों में लोगों की दैनिक जरूरतों से जुड़ी सुविधाओं और गतिविधियों को जगह देने की गुंजाइश बढ़ाई गई है। स्कूल, अस्पताल और कार्यालय जैसी सुविधाओं को आवासीय तथा वाणिज्यिक भूमि उपयोग की श्रेणियों में अनुमत्य बनाया गया है। इससे लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और कामकाज से जुड़ी सेवाएं अपने घर के आसपास उपलब्ध हो सकती हैं। साथ ही, रोजाना लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होने और समय बचने की संभावना है।
औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए आवास की सुविधा
औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हॉस्टल, डॉर्मिटरी और श्रमिक आवास जैसी सुविधाओं को अनुमत्य गतिविधियों में शामिल किया गया है। इसके अलावा मनोरंजन भूमि उपयोग की श्रेणी में श्मशान और कब्रिस्तान से संबंधित आवश्यक गतिविधियों को भी अनुमति दी गई है। इन प्रावधानों का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में जमीन के उपयोग को स्थानीय और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप बनाना है।
निवेश और शहरी विकास को मिल सकती है गति
सरकार के इस बदलाव से भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल बनाने, निवेश आकर्षित करने और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव संशोधित नियमों के क्रियान्वयन और संबंधित अनुमतियों की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन को राज्य की नियामकीय व्यवस्था अधिक लचीली और व्यावहारिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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