Chhattisgarh Crime
Chhattisgarh Crime : छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ अंधविश्वास की वेदी पर एक महिला की बलि चढ़ा दी गई। पेंड्रा थाना क्षेत्र के ग्राम खरड़ी में जादू-टोना के संदेह में एक अधेड़ महिला की पत्थर से कुचलकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी धीरपाल और उसके दो अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना समाज में पैठ जमाए बैठे अंधविश्वास के उस भयानक चेहरे को उजागर करती है, जो आज भी मासूमों की जान ले रहा है।
इस खौफनाक वारदात की नींव लगभग 5 महीने पहले पड़ी थी। मुख्य आरोपी धीरपाल (50 वर्ष) के बेटे की कुछ समय पहले बीमारी के कारण इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी। धीरपाल अपने जवान बेटे की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। दुख और अज्ञानता के कारण उसने यह मान लिया कि उसके बेटे की मृत्यु प्राकृतिक नहीं थी, बल्कि उसकी रिश्तेदार और पड़ोसी कौशल्या ने उस पर जादू-टोना किया था। यही संदेह धीरे-धीरे प्रतिशोध की ज्वाला में बदल गया और धीरपाल ने कौशल्या को खत्म करने की साजिश रच डाली।
सोमवार का दिन कौशल्या के लिए काल बनकर आया। धीरपाल और उसके साथियों ने पहले से ही कौशल्या की गतिविधियों पर नजर रखी हुई थी। जब दोपहर के समय घर के बाकी सदस्य बाहर गए हुए थे और कौशल्या घर में बिल्कुल अकेली थी, तब धीरपाल अपने दो परिचितों के साथ जबरन घर के भीतर दाखिल हुआ। आरोपियों ने आव देखा न ताव और कौशल्या पर भारी पत्थरों से ताबड़तोड़ हमला शुरू कर दिया। हमला इतना भीषण था कि कौशल्या का सिर बुरी तरह कुचल गया और अत्यधिक रक्तस्राव होने के कारण उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
जब कौशल्या के परिजन काम खत्म कर घर वापस लौटे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। घर के भीतर कौशल्या का लहूलुहान शव पड़ा था। परिजनों ने तुरंत इस घटना की जानकारी स्थानीय पेंड्रा पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम फॉरेंसिक विशेषज्ञों के साथ मौके पर पहुँची। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाने के बाद शव को पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। शुरुआती जांच में ही पुलिस को आपसी रंजिश और जादू-टोने के एंगल पर शक हो गया था।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने संदेह के आधार पर धीरपाल को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की। पहले तो वह मुकरता रहा, लेकिन मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ने पर उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। धीरपाल की निशानदेही पर उसके दो अन्य साथियों को भी धर दबोचा गया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या और टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों को स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया। पुलिस ने अदालत को वारदात की गंभीरता और बरामद किए गए साक्ष्यों के बारे में जानकारी दी। माननीय न्यायालय ने आरोपियों के कृत्य को जघन्य मानते हुए उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने का आदेश दे दिया है। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन और समाज के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक अंधविश्वास के चलते निर्दोष लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे। फिलहाल, गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस स्थिति पर नजर रखे हुए है।
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