छत्तीसगढ़

Dhamtari Bulldozer Action : धमतरी में रेलवे का बड़ा एक्शन, बस स्टैंड के पास अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर

Dhamtari Bulldozer Action : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में सोमवार, 6 अप्रैल को प्रशासन और रेलवे की ओर से एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई देखने को मिली। रेलवे प्रशासन ने शहर के व्यस्ततम इलाके बस स्टैंड के पास हुए पुराने अतिक्रमण पर अपना ‘बुलडोजर’ चला दिया। यह कार्रवाई सुबह-सुबह सिहावा चौक से शुरू होकर बस स्टैंड की ओर बढ़ी, जिससे स्थानीय व्यापारियों और कब्जेधारियों में अफरा-तफरी मच गई। रेलवे की जमीन पर दशकों से जमे अवैध निर्माणों को ढहाने के लिए विभाग ने पूरी तैयारी कर रखी थी, जिसके चलते इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया।

भारी पुलिस बल की तैनाती: निगम और रेलवे की संयुक्त टीम मुस्तैद

कार्रवाई की संवेदनशीलता को देखते हुए मौके पर केवल रेलवे के अधिकारी ही नहीं, बल्कि भारी संख्या में पुलिस बल और नगर निगम की टीम भी मौजूद रही। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि विरोध की स्थिति में कानून-व्यवस्था न बिगड़े। रेलवे की इंजीनियरिंग टीम और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने पहले से ही उन स्थानों को चिन्हित कर लिया था, जो रेलवे की सीमा के भीतर आ रहे थे। जैसे ही बुलडोजर ने दुकानों और ढांचों को गिराना शुरू किया, भारी भीड़ जमा हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

विधायक का विरोध: वैध दस्तावेजों और समय देने की मांग पर अड़े

कार्रवाई की खबर मिलते ही धमतरी विधायक तत्काल मौके पर पहुंचे और रेलवे की इस प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया। विधायक ने आरोप लगाया कि प्रशासन और रेलवे जल्दबाजी में कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन व्यापारियों के पास जमीन और दुकान के वैध दस्तावेज हैं, उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई करना अन्यायपूर्ण है। विधायक का तर्क था कि गरीब छोटे व्यापारियों को अपना सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से चर्चा की और कुछ दुकानों को राहत देने की अपील की, हालांकि कार्रवाई जारी रही।

अल्टीमेटम की समय सीमा समाप्त: 6 अप्रैल की डेडलाइन के बाद एक्शन

रेलवे प्रशासन का पक्ष है कि यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई है। जानकारी के अनुसार, रेलवे ने संबंधित अतिक्रमणकारियों को बहुत पहले ही नोटिस जारी कर दिया था। उन्हें स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई थी कि वे 6 अप्रैल तक रेलवे की भूमि को स्वतः खाली कर दें। जब निर्धारित समय सीमा (डेडलाइन) समाप्त हो गई और कब्जेधारियों ने जमीन नहीं छोड़ी, तब विभाग ने कानूनी प्रक्रिया के तहत बलपूर्वक अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया। रेलवे के अनुसार, क्षेत्र के विकास और आगामी परियोजनाओं के लिए इस जमीन का अतिक्रमण मुक्त होना अनिवार्य है।

सात दुकानों पर चला बुलडोजर: अधिकारियों ने साधी चुप्पी

जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, बुलडोजर की दहाड़ तेज होती गई। अब तक की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग सात पक्की और कच्ची दुकानों को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया गया है। कई अन्य ढांचों को भी ढहाने की तैयारी चल रही है। हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी कार्रवाई के बीच रेलवे के आला अधिकारियों ने मीडिया से दूरी बनाए रखी। बार-बार पूछे जाने पर भी अधिकारियों ने इस ऑपरेशन के आगामी चरणों या विस्तृत योजना पर कोई भी आधिकारिक बयान देने से साफ इनकार कर दिया।

व्यापारियों में भारी रोष: भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता

इस बुलडोजर कार्रवाई ने धमतरी के व्यावसायिक गलियारों में एक नई चिंता पैदा कर दी है। जिन लोगों की दुकानें तोड़ी गई हैं, वे अब अपने भविष्य और आजीविका को लेकर संकट में हैं। व्यापारियों का कहना है कि वे वर्षों से यहाँ व्यापार कर रहे थे और अचानक हुई इस कार्रवाई ने उन्हें सड़क पर ला दिया है। वहीं, जिला प्रशासन और रेलवे का रुख स्पष्ट है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस बल अब भी तैनात है।

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