Surguja Ghar Wapsi
Surguja Ghar Wapsi : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से धर्मांतरण के बढ़ते मामलों के बीच ‘घर वापसी’ की एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ लखनपुर ब्लॉक के पटकुरा ग्राम पंचायत में मझवार समाज के तीन परिवारों ने ईसाई धर्म छोड़कर पुनः अपने मूल हिंदू धर्म को अपना लिया है। पिछले पांच वर्षों से ईसाई रीति-रिवाजों का पालन कर रहे इन परिवारों को समाज के प्रमुखों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की पहल पर वापस लाया गया है। यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि इसे सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ों की ओर लौटने की एक बड़ी मुहिम के रूप में देखा जा रहा है।
मामला लखनपुर विकासखंड के ग्राम पटकुरा का है, जहाँ सालिक राम, बैगा राम मझवार और बढ़ईक राम मझवार के परिवारों ने करीब आधा दशक पहले अज्ञात कारणों और परिस्थितियों वश ईसाई धर्म अपना लिया था। ये परिवार मझवार समाज से ताल्लुक रखते हैं, जो संवैधानिक रूप से अनुसूचित जनजाति वर्ग का हिस्सा हैं और पारंपरिक रूप से हिंदू देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। पांच वर्षों तक ईसाई धर्म की प्रार्थनाओं और पद्धतियों से जुड़े रहने के बाद, समाज के साथ इनके संवाद में कमी आने लगी थी, जिसे देखते हुए समाज के प्रबुद्ध जनों ने पहल शुरू की।
इस घर वापसी कार्यक्रम के मुख्य सूत्रधार ग्राम पंचायत पटकुरा के सरपंच और मझवार समाज के प्रमुख सोनसाय मझवार रहे। उन्होंने बताया कि समाज के लोगों के बीच इस बात को लेकर लंबे समय से चिंता थी कि उनके अपने लोग अपनी मूल पहचान खो रहे हैं। इसके लिए गाँव में एक विशेष बैठक बुलाई गई, जिसमें समाज के बुजुर्गों और प्रमुखों ने तीनों परिवारों के सदस्यों के साथ घंटों चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य उन्हें उनकी परंपराओं, रीति-रिवाजों और पूर्वजों की पूजा पद्धति के महत्व को समझाना था। इस दौरान परिवारों की ओर से भी अपनी बातें रखी गईं और अंततः उन्होंने स्वेच्छा से वापसी की इच्छा जताई।
तीनों परिवारों की सहमति मिलने के बाद हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शुद्धिकरण और घर वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई। समाज के लोगों ने विधि-विधान से पूजा-पाठ का आयोजन किया। कलश के दीप जलाए गए और मंत्रोच्चार के बीच सभी 16 सदस्यों को पुनः हिंदू धर्म की मुख्यधारा में शामिल कराया गया। इस अवसर पर परिवारों ने वचन दिया कि वे अब से अपनी पुरानी परंपराओं का निर्वहन करेंगे और हिंदू धर्म के त्यौहारों व परंपरागत पूजा-पाठ में सक्रिय रूप से भाग लेंगे। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पूरे गाँव का वातावरण भक्तिमय हो गया।
घर वापसी की इस प्रक्रिया के संपन्न होने के बाद मझवार समाज ने इस अवसर को एक उत्सव की तरह मनाया। देर रात तक गाँव में जश्न का माहौल रहा और खुशी में एक भव्य रात्रि भोज (सामूहिक भोज) का आयोजन किया गया। समाज के लोगों का मानना है कि यह केवल कुछ लोगों की वापसी नहीं है, बल्कि समाज की एकता की जीत है। सरपंच सोनसाय मझवार ने इस मौके पर कहा कि पिछड़े इलाकों में अक्सर भोले-भाले ग्रामीण किसी प्रलोभन या भ्रम के कारण अपना धर्म बदल लेते हैं, लेकिन अब समाज जागरूक हो रहा है।
सरपंच सोनसाय मझवार और समाज के अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने इस घटना के माध्यम से जिले के अन्य लोगों को भी जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरगुजा के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में धर्मांतरण की गतिविधियां काफी सक्रिय हैं, जिन्हें रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। मझवार समाज अब अन्य गांवों में भी ऐसे लोगों से संपर्क साधने की योजना बना रहा है जो अपनी जड़ों से कट चुके हैं। प्रशासन और पुलिस भी इस संवेदनशील मामले पर नजर बनाए हुए है ताकि क्षेत्र में सामाजिक समरसता बनी रहे।
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