CJP Protest: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके पर निशाना साधते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रिजिजू ने कहा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अभिजीत दीपके आम आदमी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता हैं और यह बात सार्वजनिक रूप से जानी जाती है।
छात्रों की चिंताओं पर सरकार का रुख
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी युवाओं और छात्रों से जुड़े विषयों पर काम किया है। रिजिजू ने कहा कि छात्रों की समस्याओं को सुनना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन किसी राजनीतिक दल को इन मुद्दों का फायदा उठाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने आंदोलन और राजनीति के बीच अंतर बनाए रखने पर जोर दिया।
CJP ने केंद्र पर लगाया था गंभीर आरोप
रिजिजू का बयान ऐसे समय आया है जब CJP ने एक दिन पहले केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। संगठन ने दावा किया था कि सरकार छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट की कोशिशों में बाधा डाल रही है। CJP ने मांग की है कि पुलिस की कथित ज्यादती और हिंसा के आरोपों की जांच के लिए प्रस्तावित उच्चाधिकार प्राप्त समिति में संगठन के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट में हुई अहम सुनवाई
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में उन याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिनमें परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ CJP के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाओं में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कठोर कार्रवाई के आरोप लगाए गए। इसके साथ ही प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा के आरोपों से जुड़े मामलों पर भी अदालत में सुनवाई हुई।
प्रदर्शनकारियों की FIR रद्द करने की मांग
CJP के प्रवक्ता सौरभ दास के मुताबिक, याचिकाकर्ता छात्रों की ओर से अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष देशभर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की मांग रखी। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अदालत से विशेष अधिकार का इस्तेमाल करने का आग्रह किया। CJP का कहना है कि आंदोलन समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
केंद्र के प्रतिनिधियों से हुई थी बातचीत
सौरभ दास के अनुसार, वकील वृंदा ग्रोवर ने अदालत में यह भी दलील दी कि केंद्र सरकार को प्राथमिकी रद्द करने पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह समेत केंद्र के प्रतिनिधियों ने 25 जुलाई को प्रदर्शनकारियों की मांगों पर बातचीत की थी। CJP के मुताबिक, इसके बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट बनाएगा जांच समिति
18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित बर्बर कार्रवाई और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा के आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित करेगा। प्रस्तावित समिति में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के अलावा एक पूर्व पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के एक पूर्व निदेशक को शामिल किए जाने की बात कही गई है।
चेहरे की पहचान तकनीक पर CJP के सवाल
CJP ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान चेहरा पहचानने वाली तकनीक के कथित इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन के प्रवक्ता सौरभ दास ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए गए तथा CCTV कैमरों के जरिए उनकी निगरानी की गई। उन्होंने चेहरे की पहचान तकनीक के इस्तेमाल से जुड़े संभावित संवैधानिक और निजता संबंधी सवाल उठाए।
सुरक्षा और निजता को लेकर चिंता
सौरभ दास ने कहा कि चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक का गलत इस्तेमाल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, ऐसी तकनीक के इस्तेमाल के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपाय और स्पष्ट नियम होने चाहिए। CJP का मानना है कि प्रदर्शनकारियों की निगरानी और डेटा के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता जरूरी है।
छात्र आंदोलन पर बढ़ी राजनीतिक हलचल
CJP के आंदोलन और उससे जुड़े कानूनी मामलों को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। एक तरफ केंद्र सरकार छात्रों की चिंताओं पर काम करने की बात कह रही है, तो दूसरी ओर CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों और पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है। इसी बीच किरेन रिजिजू के बयान ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक रंग दे दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट की आगामी कार्यवाही पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है।
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