Bhubaneswar climate crisis: एक ओर जहां भुवनेश्वर शहर तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी (iFOREST) की हालिया रिपोर्ट ने शहर की जलवायु और पर्यावरणीय स्थिति को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है।

मकानों में बढ़ोतरी, हरियाली में गिरावट
2018 की तुलना में 2024 में भुवनेश्वर में मकान निर्माण में 23% की वृद्धि हुई है। इस तेजी से होते विकास के कारण 9.8% पेड़ काटे जा चुके हैं और 75% जलाशयों को खत्म कर वहां निर्माण कार्य कर दिए गए हैं। ये आंकड़े यह दर्शाते हैं कि शहरीकरण के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का भारी दोहन हो रहा है।

गर्मी का कहर: 2050 तक 2.5 डिग्री तक बढ़ सकता है तापमान
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि मौजूदा हालात जारी रहे, तो 2050 तक भुवनेश्वर का औसत तापमान 2 से 2.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। 2024 में 17 दिन लगातार तापमान 40 डिग्री से ऊपर रहा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भविष्य में गर्मी की स्थिति कितनी भयावह हो सकती है।
हीटवेव का खतरनाक ट्रेंड
पूरे साल में 232 दिन गर्मी को लेकर चेतावनी जारी की गई, जिनमें से 77 दिन येलो अलर्ट और 55 दिन ऑरेंज अलर्ट के अंतर्गत रहे। चौंकाने वाली बात यह है कि जनवरी और दिसंबर को छोड़कर सभी महीनों में हीटवेव का असर देखा गया।
अप्रैल: 10 दिन ऑरेंज अलर्ट
मई: 17 दिन ऑरेंज अलर्ट
जून: 20 दिन ऑरेंज अलर्ट
जुलाई से अक्टूबर तक: 25+ दिन येलो अलर्ट
स्थानीय लोगों की परेशानी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अब फरवरी से ही पंखा और कूलर चालू करना पड़ता है। एक महिला निवासी ने बताया कि गर्मी के कारण बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। बारिश भी अब समय पर नहीं होती, जिससे स्थिति और बिगड़ती जा रही है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
पर्यावरणविद् प्रो. रथींद्र नायक ने कहा कि यदि हरित आवरण और जलाशयों की रक्षा नहीं की गई, तो न केवल गर्मी बढ़ेगी, बल्कि जल संकट, बीमारियां और वायु प्रदूषण भी गंभीर स्तर तक पहुंच सकते हैं।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
शहरवासी प्रशासन से निर्माण कार्यों पर नियंत्रण और पेड़ों की कटाई तथा जलाशयों के अतिक्रमण को रोकने की मांग कर रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में औसत तापमान में 1 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। रात का तापमान भी पहले से अधिक रहने लगा है, जिससे शहर की गर्मी रात में भी कम नहीं होती।
भुवनेश्वर एक खतरनाक मोड़ पर खड़ा है जहां तेजी से हो रहा शहरीकरण, पर्यावरणीय क्षरण का मुख्य कारण बन चुका है। अगर समय रहते हरित नीति और सतत विकास की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले सालों में यह शहर रहने लायक नहीं रह जाएगा।
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