CJP Bengaluru Protest: देश में परीक्षाओं की शुचिता और छात्रों के भविष्य को लेकर मचे घमासान के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का देशव्यापी आंदोलन तेज होता जा रहा है. रविवार शाम को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मूसलाधार बारिश के बावजूद CJP के कार्यकर्ताओं और आम जनता ने सड़कों पर उतरकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया. इस आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली जब जाने-माने फिल्म अभिनेता और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहने वाले प्रकाश राज भी प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाने खुद वहां पहुंचे. प्रदर्शन के दौरान उनके हाथों में एक फूल था, जो शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से विरोध दर्ज कराने का प्रतीक नजर आ रहा था. बेंगलुरु की सड़कों पर खराब मौसम के बाद भी युवाओं और नागरिकों का जोश कम नहीं हुआ और लोग व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद करते दिखे.

हाथों में पोस्टर और छाते लेकर मांग: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत दें इस्तीफा
जैसे ही बेंगलुरु में प्रदर्शन शुरू हुआ, आसमान से तेज बारिश होने लगी, लेकिन इससे आंदोलनकारियों के कदम नहीं रुके. लोग एक हाथ में छाता और दूसरे हाथ में सरकार विरोधी नारे लिखे पोस्टर लेकर प्रदर्शन स्थल पर डटे रहे. इस विरोध प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) समेत कई अन्य प्रमुख छात्र संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों का मुख्य गुस्सा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के कथित पेपर लीक मामले और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रक्रिया में सामने आई गंभीर गड़बड़ियों को लेकर था. छात्रों और CJP कार्यकर्ताओं ने सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इन तमाम विफलताओं के लिए जिम्मेदार ठहराया और सामूहिक स्वर में उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की.

दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन पांच प्रमुख शहरों में फैला
शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब देशव्यापी रूप ले चुका है. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके समर्थकों द्वारा पिछले 9 दिनों के भीतर देश के पांच अलग-अलग बड़े शहरों में सिलसिलेवार तरीके से विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया जा चुका है. इस व्यापक अभियान की औपचारिक शुरुआत बीते 6 जून को देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर से हुई थी. दिल्ली में अपनी आवाज बुलंद करने के बाद, इस आंदोलन की गूंज 11 जून को महाराष्ट्र के पुणे शहर में सुनाई दी. इसके ठीक अगले दिन यानी 12 जून को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रदर्शन किया गया और फिर 13 जून को पंजाब के अमृतसर में युवाओं ने हुंकार भरी. बेंगलुरु इस कड़ी का पांचवां शहर रहा, जहां शिक्षा मंत्री के खिलाफ जनाक्रोश देखने को मिला.
एकजुटता और सोनम वांगचुक का प्रेरक संबोधन
बेंगलुरु से पहले इस आंदोलन की एक बेहद मजबूत तस्वीर तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के प्रसिद्ध धरना चौक पर देखने को मिली थी. वहां आयोजित विशाल विरोध प्रदर्शन में देश के विख्यात पर्यावरणविद् और सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने विशेष रूप से शिरकत की और आंदोलनकारियों को संबोधित किया. हैदराबाद में प्रदर्शन की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हुईं, जिसमें छात्रों का हुजूम दिखाई दिया. वांगचुक ने युवाओं की इस मुहिम की सराहना करते हुए कहा कि जब तक देश के नौजवान अपने अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए खड़े नहीं होंगे, तब तक व्यवस्था में सुधार की कल्पना करना पूरी तरह बेमानी है.
यह सत्ता या पार्टी बनाने का नहीं
हैदराबाद की जनसभा में अपने प्रेरक संबोधन के दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने इस आंदोलन के वास्तविक चरित्र और उद्देश्य को देश के सामने रखा. उन्होंने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा, “यह कोई ऐसा आंदोलन नहीं है जिसका मकसद किसी को शिक्षा मंत्री बनाना हो या किसी नए राजनीतिक दल का गठन करना हो. यह असल में देश के करोड़ों होनहार युवाओं के साथ व्यवस्था द्वारा की जा रही ऐतिहासिक और गंभीर गलतियों को सुधारने का एक पवित्र आंदोलन है. मैं इसे एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश के नागरिकों का एक सामूहिक जागरण मानता हूं.” उन्होंने उपस्थित जनसमूह को याद दिलाया कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ देश के विकास को रोकने जैसा है.
भय और नफरत से मुक्त भारत का निर्माण
सोनम वांगचुक ने अपने भाषण को आगे बढ़ाते हुए देश के भविष्य और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि हमारा अंतिम लक्ष्य एक ऐसी सुदृढ़ लोकतांत्रिक व्यवस्था का निर्माण करना होना चाहिए, जहां भारत पूरी तरह से भय और नफरत के माहौल से मुक्त हो. देश के हर एक नागरिक को बिना किसी पाबंदी, डर या संदेह के अपनी पूरी स्वतंत्रता का आनंद लेने का अधिकार मिलना चाहिए. उन्होंने साफ किया कि यह आंदोलन केवल मौजूदा परीक्षाओं की गड़बड़ियों को ठीक करने तक ही सीमित नहीं रहने वाला है. इसका दूरगामी मकसद हमारी पूरी प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था की बुनियादी नींव को मजबूत करना है. इसके लिए आने वाले दिनों में बुद्धिजीवियों और युवाओं के साथ मिलकर एक व्यापक रोडमैप तैयार किया जाएगा, हालांकि उन्होंने माना कि फिलहाल देश के सामने सबसे तात्कालिक और बड़ी समस्या परीक्षाओं में हो रही धांधली को रोकना ही है.
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