FIFA World Cup 2026: फीफा वर्ल्ड कप 2026 के महाकुंभ में ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने एक जबरदस्त उलटफेर करते हुए फुटबॉल जगत में तहलका मचा दिया है. टूर्नामेंट के एक बेहद रोमांचक मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने खुद से कहीं अधिक मजबूत मानी जा रही तुर्की की टीम को 2-0 के अंतर से धूल चटा दी. ऑस्ट्रेलिया की इस शानदार और ऐतिहासिक जीत के बीच, भारतीय फुटबॉल प्रशंसक सोशल मीडिया और खेल गलियारों में एक खास खिलाड़ी के बारे में बढ़-चढ़कर चर्चा कर रहे हैं. इस खिलाड़ी का नाम निशान वेलुपिल्लई है, जिन्होंने इस मैच में उतरकर एक नया इतिहास रच दिया है.

भारतीय मूल का गौरव
दरअसल, विंगर निशान वेलुपिल्लई भारतीय मूल के फुटबॉलर हैं, जो इस बार विश्व कप के सबसे बड़े मंच पर ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. फुटबॉल के इतिहास में यह केवल दूसरा ऐसा मौका है जब कोई ऐसा खिलाड़ी फीफा वर्ल्ड कप के मैदान पर उतरा है, जिसके खून में भारत का अंश मौजूद है. भारतीय प्रशंसकों के लिए यह पल बेहद भावुक और गर्व से भरा हुआ है, क्योंकि विश्व कप के मुख्य दौर में भारतीय टीम भले ही न हो, लेकिन भारतीय मूल के खिलाड़ियों की मौजूदगी फैंस का उत्साह दोगुना कर रही है.

विकास धोरासु की यादें ताजा
निशान से ठीक 20 साल पहले, साल 2006 में विकास धोरासु नाम के एक बेहतरीन मिडफील्डर ने जर्मनी में आयोजित हुए फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया था. हालांकि, विकास ने उस समय फ्रांस की प्रसिद्ध नीली जर्सी पहनकर मैदान पर कदम रखा था, लेकिन उनके पूर्वज मूल रूप से भारत के आंध्र प्रदेश राज्य के विजयनगरम के रहने वाले थे. अब तक के फुटबॉल इतिहास में विकास धोरासु ही विश्व फुटबॉल के इस सबसे प्रतिष्ठित मंच पर भारत के इकलौते प्रतिनिधि माने जाते थे. लेकिन अब 25 वर्षीय निशान वेलुपिल्लई ने उस विशिष्ट सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया है. निशान के पिता श्रीलंकाई-तमिल हैं और उनकी माता एंग्लो-इंडियन हैं.
मेलबर्न विक्ट्री से अंतरराष्ट्रीय मंच तक
निशान वेलुपिल्लई ऑस्ट्रेलियाई घरेलू फुटबॉल का एक बेहद जाना-माना और प्रतिष्ठित चेहरा हैं. 25 साल के इस आक्रामक विंगर ने मेलबर्न विक्ट्री क्लब के लिए खेलते हुए ‘A’ लीग में 100 से अधिक मैचों का लंबा अनुभव हासिल किया है. उनके इसी शानदार प्रदर्शन को देखते हुए साल 2024 में उन्हें पहली बार ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय टीम में खेलने का मौका मिला था. पिछले कुछ समय से वह राष्ट्रीय टीम के नियमित सदस्य बने हुए हैं. उन्होंने चीन और इंडोनेशिया जैसी मजबूत एशियाई टीमों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मैचों में ऑस्ट्रेलिया के लिए महत्वपूर्ण गोल भी दागे हैं और अब वे विश्व कप टीम का हिस्सा हैं.
61वें मिनट में मैदान पर एंट्री और मजबूत डिफेंस का नजारा
रविवार सुबह तुर्की के खिलाफ खेले गए मुकाबले में निशान ऑस्ट्रेलिया की शुरुआती ‘फर्स्ट इलेवन’ (प्लेइंग XI) का हिस्सा नहीं थे. उन्हें मुख्य कोच ने रणनीति के तहत 61वें मिनट में सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर उतारा. मैदान पर आने के बाद निशान ने मुख्य रूप से टीम के डिफेंस को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाई. दिलचस्प बात यह रही कि ऑस्ट्रेलिया ने मैच का दूसरा निर्णायक गोल निशान के मैदान पर आने के बाद ही किया. आपको बता दें कि इस बार के वर्ल्ड कप में चार अलग-अलग देशों की स्क्वॉड में एक-एक ऐसा फुटबॉलर शामिल है जिसका रिश्ता किसी न किसी रूप में भारत से है, और इनमें निशान सबसे लोकप्रिय हैं.
तुर्की की 24 साल बाद वापसी
दूसरी ओर, तुर्की की टीम पूरे 24 साल के लंबे इंतजार के बाद फीफा वर्ल्ड कप में खेलने उतरी थी. फुटबॉल विश्लेषक और सट्टा बाजार उन्हें इस मैच में जीत का प्रबल दावेदार मान रहे थे. पूरे मैच के दौरान तुर्की की ब्रिगेड ने मैदान पर अपना जबरदस्त दबदबा बनाए रखा और ऑस्ट्रेलिया के गोल पोस्ट पर एक के बाद एक कुल 28 शॉट दागे. हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई गोलकीपर और मजबूत डिफेंस के आगे उनकी एक न चली और वे एक भी गोल नहीं कर सके. ऑस्ट्रेलिया ने यह मैच 2-0 से जीतकर नॉकआउट की रेस में अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली है.
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