Congress on US -Iran Deal: कांग्रेस पार्टी ने हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच संपन्न हुए 14-सूत्रीय ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ (एमओयू) को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर कड़े प्रहार किए हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया है कि इस समझौते में पाकिस्तान की मुख्य भूमिका मोदी सरकार के लिए एक बड़ा राजनयिक झटका है। कांग्रेस का मानना है कि जिस पाकिस्तान को 2008 के मुंबई हमलों के बाद वैश्विक स्तर पर अलग-थलग कर दिया गया था, उसका आज फिर से उभरना भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

पाकिस्तान का बढ़ता वैश्विक प्रभाव और भारत के लिए चुनौती
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘इस्लामाबाद एमओयू’ का नाम ही इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान ने अपनी खोई हुई क्षेत्रीय प्रतिष्ठा और वैश्विक प्रभाव को पुनः प्राप्त कर लिया है। कांग्रेस नेता के अनुसार, पाकिस्तान अब पश्चिम एशिया की सुरक्षा संरचना में पहले से कहीं अधिक गहराई से शामिल हो गया है, जिसके भारत के लिए दूरगामी और नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं। रमेश ने चेतावनी दी कि यदि यह समझौता पूरी तरह लागू होता है, तो यह क्षेत्र की भू-राजनीति को पूरी तरह से बदल सकता है।

ईरान की कूटनीतिक जीत और नेतन्याहू के लिए बड़ा झटका
कांग्रेस महासचिव ने इस समझौते को ईरान की एक अप्रत्याशित और बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद अपनी दृढ़ता का प्रदर्शन किया है। साथ ही, कांग्रेस ने इसे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की स्पष्ट पराजय करार दिया है। रमेश के अनुसार, नेतन्याहू आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुके हैं, और यहां तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सार्वजनिक रूप से उनके प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की है।
प्रधानमंत्री मोदी पर ‘अंधभक्ति’ और ‘राष्ट्र-विरोधी’ तुष्टिकरण का आरोप
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर इज़राइल के प्रति ‘अंधभक्ति’ रखने का गंभीर आरोप लगाया है। जयराम रमेश ने कहा कि पूरे क्षेत्र में नेतन्याहू की सैन्य कार्रवाइयों का समर्थन करके मोदी सरकार देश को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर रही है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की ट्रंप के प्रति नीति को ‘शर्मनाक’ और ‘राष्ट्र-विरोधी’ करार दिया है। पार्टी का कहना है कि सैन्य शक्ति की सीमाएं एक बार फिर उजागर हुई हैं, और मोदी सरकार का अमेरिकी नेतृत्व को खुश करने का प्रयास कूटनीतिक रूप से देश के हितों के लिए हानिकारक साबित हो रहा है।
आगामी 60 दिन कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण
अंत में, कांग्रेस नेता ने आगाह किया कि इस समझौते में कई अनिश्चितताएं भी हैं। उनके मुताबिक, यह एमओयू दोनों पक्षों के लिए ‘गलतफहमी का समझौता’ भी साबित हो सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले 60 दिनों में इस समझौते को कैसे लागू किया जाता है। कांग्रेस के इस तीखे हमले ने केंद्र सरकार के सामने एक नई कूटनीतिक चुनौती पेश कर दी है, जिससे सरकार की विदेश नीति को लेकर आगामी दिनों में और अधिक राजनीतिक बहस छिड़ने की संभावना है।

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