RUPP Tax Evasion : कांग्रेस ने पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों यानी RUPPs से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि कुछ RUPPs का इस्तेमाल कथित तौर पर टैक्स चोरी और काले धन को वैध दिखाने के लिए किया गया। कांग्रेस ने पूरे मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC से कराने की मांग की है। पार्टी नेता शक्तिसिंह गोहिल ने करीब 3,260 RUPPs से जुड़े वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई है।
शक्तिसिंह गोहिल ने राजनीतिक दलों की फंडिंग पर उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने दावा किया कि कुछ गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के माध्यम से बड़े पैमाने पर चंदे की रकम दिखाई गई और संबंधित लोगों या संस्थाओं ने कर लाभ हासिल किया। उन्होंने भाजपा पर कथित वित्तीय गतिविधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और भाजपा की ओर से इस मामले पर जवाब दिए जाने की स्थिति में तस्वीर का दूसरा पक्ष भी सामने आ सकता है।
आयकर कानून के प्रावधानों का कांग्रेस ने किया उल्लेख
गोहिल ने राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले चंदे से संबंधित आयकर कानून के प्रावधानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले राजनीतिक दलों को मिलने वाले दान पर कर संबंधी लाभ उपलब्ध होते हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इसी व्यवस्था का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कुछ RUPPs के माध्यम से किया गया। पार्टी ने इन दलों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच की मांग की है।
जयराम रमेश ने सरकार से पूछे कई सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि हजारों गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, तो उनकी जांच क्यों नहीं की जा रही है। रमेश ने कथित रूप से जुड़े लोगों की पहचान और वित्तीय लेनदेन की जांच की मांग की। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के बैंक खातों पर हुई कार्रवाई का भी संदर्भ दिया।
कांग्रेस ने 2025 की रिपोर्ट का दिया हवाला
शक्तिसिंह गोहिल ने दावा किया कि वर्ष 2025 में सामने आई एक रिपोर्ट में RUPPs से संबंधित कथित गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया था। कांग्रेस के मुताबिक, अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की सिफारिश किए जाने के बावजूद आगे अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए। इसी आधार पर कांग्रेस ने मामले की जांच के लिए JPC गठित करने की मांग दोहराई है।
दोषियों पर कार्रवाई की कांग्रेस ने रखी मांग
कांग्रेस ने कथित वित्तीय अनियमितताओं में शामिल पाए जाने वाले लोगों और संस्थाओं पर कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है। गोहिल ने दोषी पाए जाने वालों पर भारी आर्थिक दंड लगाने की बात कही। उन्होंने कथित फर्जीवाड़े में मदद करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के खिलाफ भी आपराधिक कार्रवाई और दोष साबित होने पर उनके लाइसेंस रद्द करने की मांग रखी।
ADR रिपोर्ट में RUPPs की पारदर्शिता पर सवाल
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी ADR की रिपोर्टों में भी RUPPs की वित्तीय पारदर्शिता और अनुपालन से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया है। ADR के अनुसार, देश में बड़ी संख्या में ऐसे राजनीतिक दल पंजीकृत हैं जो राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं हैं। रिपोर्टों में कुछ दलों के वित्तीय दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होने की बात भी सामने आई है।
कई RUPPs के चुनाव लड़ने पर भी सवाल
RUPPs ऐसे राजनीतिक दल हैं जो चुनाव आयोग के साथ पंजीकृत होते हैं, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त नहीं होती। ADR ने अपनी रिपोर्टों में बताया है कि कुछ पंजीकृत दल लंबे समय तक चुनाव नहीं लड़ते। इसके बावजूद राजनीतिक चंदे और कर संबंधी लाभों की व्यवस्था उनके लिए सवाल खड़े करती है। चुनाव आयोग समय-समय पर निष्क्रिय या नियमों का पालन नहीं करने वाले दलों के खिलाफ कार्रवाई करता रहा है।
अब चुनाव आयोग और भाजपा की प्रतिक्रिया पर नजर
कांग्रेस के आरोपों के बीच चुनाव आयोग और भाजपा की प्रतिक्रिया इस विवाद में महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल कांग्रेस ने कथित 10 हजार करोड़ रुपये के टैक्स और चंदा विवाद की JPC जांच की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित सरकारी संस्थाओं की जांच के बाद ही पूरे मामले से जुड़े तथ्य स्पष्ट हो सकेंगे। इसलिए फिलहाल सामने आए दावों को कांग्रेस के आरोपों और ADR की रिपोर्टों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
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