CJP Protest : SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर जारी विवाद के बीच सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है। मुंबई में हुए प्रदर्शन और संगठन की गतिविधियों को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इसी क्रम में CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके की आलोचना को लेकर संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
अभिजीत दीपके की आलोचना पर आशुतोष रांका ने साधा निशाना
CJP से जुड़े आशुतोष रांका ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अभिजीत दीपके की आलोचना करने वालों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने पोस्ट में दावा किया कि दीपके की आलोचना के लिए खुद को लिबरल कहने वाला एक पूरा इकोसिस्टम सक्रिय हो गया है। रांका के मुताबिक, यह आलोचना उस समय हो रही है जब अभिजीत दीपके लंबे समय के बाद बड़ी संख्या में भारतीयों का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल हुए हैं।
‘लिबरल इकोसिस्टम’ को लेकर रांका का दावा
आशुतोष रांका ने अपने पोस्ट में इस कथित इकोसिस्टम की गतिविधियों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह समूह मुख्य रूप से ट्विटर यानी एक्स पर सक्रिय दिखाई देता है, लेकिन इसके बावजूद उसके सदस्यों को लगता है कि वे लोकतंत्र के एकमात्र रक्षक हैं। रांका की यह टिप्पणी अभिजीत दीपके के खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रही आलोचनाओं के संदर्भ में सामने आई है।
सौरव दास ने भी एक्स पर रखी अपनी बात
आशुतोष रांका के बयान के बाद CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि यह एक बड़ी समस्या है। दास के मुताबिक, एक खास वर्ग में यह धारणा मौजूद है कि भारत और संविधान को बचाने की जिम्मेदारी केवल उसी वर्ग की है। उन्होंने कहा कि इस सोच में केवल बीजेपी ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं।
‘संविधान के ठेकेदार’ वाली टिप्पणी पर चर्चा
सौरव दास ने अपनी पोस्ट में आगे कहा कि कुछ लोग खुद को लिबरल और संविधान का ठेकेदार मानते हैं। उनका यह बयान उस व्यापक बहस के बीच आया है जिसमें SIR को लेकर अलग-अलग समूहों और राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। CJP के पदाधिकारियों के इन बयानों ने संगठन के प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर उसकी आलोचना को लेकर चर्चा को और बढ़ा दिया है।
SIR प्रक्रिया को लेकर CJP की प्रमुख मांगें
CJP पिछले कुछ समय से SIR प्रक्रिया के खिलाफ अभियान चला रहा है। संगठन की प्रमुख मांगों में SIR प्रक्रिया को रोकना, जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल करना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग शामिल है। संगठन इन मांगों को लेकर अलग-अलग स्तर पर विरोध और जन-अभियान चलाने की बात कहता रहा है।
मुंबई प्रदर्शन को लेकर पुलिस से अनुमति का मुद्दा
2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर मुंबई में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर संगठन और पुलिस के बीच अनुमति का मुद्दा भी सामने आया था। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी और बाद में CJP की ओर से आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही गई। संगठन ने SIR के खिलाफ अपना अभियान जारी रखने का संकेत दिया है।
सोशल मीडिया पर तेज हुई राजनीतिक बहस
SIR को लेकर विवाद अब केवल मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर विचारों के टकराव का रूप भी ले रहा है। अभिजीत दीपके की आलोचना पर आशुतोष रांका और सौरव दास की प्रतिक्रियाओं ने इसी बहस को सामने ला दिया है। हालांकि, इन बयानों के बीच अलग-अलग पक्ष SIR प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर अपने-अपने तर्क रख रहे हैं।
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