PM Modi Privilege Motion: भारतीय राजनीति में महिला आरक्षण और संसदीय मर्यादाओं को लेकर टकराव एक नए स्तर पर पहुँच गया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का नोटिस दिया है। पार्टी का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने अपने ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ में न केवल विपक्षी सांसदों के लोकतांत्रिक अधिकारों का अपमान किया, बल्कि सदन की गरिमा को भी ठेस पहुँचाई है। यह मामला अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पाले में है, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।

केसी वेणुगोपाल का पत्र: सांसदों की स्वतंत्रता पर सवाल
कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री के आचरण पर गंभीर आपत्ति जताई। वेणुगोपाल ने तर्क दिया कि प्रधानमंत्री ने अपने 29 मिनट के भाषण के दौरान विपक्षी सांसदों के वोटिंग पैटर्न और उनके इरादों पर सवाल उठाए, जो संसदीय नियमों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले को विशेषाधिकार समिति (Privilege Committee) को सौंपा जाए ताकि प्रधानमंत्री की जवाबदेही तय की जा सके।
विशेषाधिकार हनन के चार प्रमुख आधार
लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में कांग्रेस ने चार मुख्य बिंदुओं को रेखांकित किया है:
संसदीय गरिमा: प्रधानमंत्री के बयान चुने हुए सांसदों की ईमानदारी पर सवाल उठाते हैं, जिससे संसद की स्वायत्तता कमजोर होती है।
संवैधानिक अधिकार: संविधान सांसदों को सदन के भीतर स्वतंत्र रूप से कार्य करने और वोट देने का अधिकार देता है; प्रधानमंत्री भी इस पर सवाल नहीं उठा सकते।
सदन की अवमानना: सांसदों के वोट के पीछे की मंशा पर टिप्पणी करना सदन के विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन है।
विधेयक का विरोध: कांग्रेस का कहना है कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं था, बल्कि परिसीमन से जुड़े संदिग्ध प्रावधानों के कारण उन्होंने असहमति जताई थी।
जयराम रमेश का आरोप: 59 बार कांग्रेस को बनाया निशाना
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की आलोचना की। उन्होंने कहा कि आमतौर पर ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ देश को एकजुट करने और जनता में भरोसा जगाने के लिए होता है, लेकिन इस बार इसे पूरी तरह राजनीतिक मंच बना दिया गया। रमेश के अनुसार, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 59 बार कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री के संसदीय रिकॉर्ड पर एक और ‘दाग’ करार दिया, जहाँ पद की मर्यादा को चुनावी राजनीति के लिए ताक पर रख दिया गया।
विवाद का केंद्र: 131वां संविधान संशोधन बिल और पीएम का ‘पाप’ वाला बयान
विवाद की असली जड़ 18 अप्रैल का प्रधानमंत्री का भाषण है। दरअसल, 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संशोधन बिल गिर गया था। इस बिल में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था। बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जो जरूरी 352 (दो-तिहाई बहुमत) से कम थे। इसके बाद पीएम ने विपक्ष को ‘नारी शक्ति का अपराधी’ बताते हुए कहा था कि जिन लोगों ने आधी आबादी का हक छीना है, उन्हें इस ‘पाप’ की सजा मिलेगी।
विशेषाधिकार हनन क्या है और इसकी प्रक्रिया
संसदीय लोकतंत्र में सांसदों और समितियों को कुछ विशेष अधिकार (Privileges) प्राप्त होते हैं ताकि वे बिना किसी बाहरी दबाव या डर के अपना कर्तव्य निभा सकें। यदि कोई व्यक्ति या अधिकारी इन अधिकारों में हस्तक्षेप करता है या सदन की अवमानना करता है, तो इसे विशेषाधिकार हनन माना जाता है।
इस नोटिस के बाद, लोकसभा अध्यक्ष यह तय करते हैं कि क्या मामला प्रथम दृष्टया जांच के लायक है। यदि हां, तो इसे विशेषाधिकार समिति को भेज दिया जाता है, जो अपनी रिपोर्ट सदन को सौंपती है। फिलहाल, देश की नजरें ओम बिरला के निर्णय पर टिकी हैं।

















