US Iran War : मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संबंधों को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को व्हाइट हाउस से जारी संकेतों में ट्रंप ने ‘इस्लामाबाद वार्ता 2.0’ के प्रति सकारात्मकता दिखाई, लेकिन साथ ही तेहरान को सख्त चेतावनी भी दे डाली। ट्रंप का यह रुख ‘कैरेट एंड स्टिक’ (पुरस्कार और दंड) की नीति जैसा नजर आ रहा है, जहां वे एक तरफ ईरान की जनता की क्षमता की तारीफ कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई की धमकी भी दे रहे हैं।

बड़ी डील की उम्मीद और कड़ा अल्टीमेटम
राष्ट्रपति ट्रंप ने विश्वास जताया कि तेहरान के साथ जल्द ही एक ऐतिहासिक समझौता हो सकता है। उन्होंने ईरान के लोगों को ‘सक्षम और प्रतिभावान’ बताते हुए कहा कि ईरान फिर से एक समृद्ध देश बन सकता है। हालांकि, कूटनीति के साथ उन्होंने सैन्य धमकी का इस्तेमाल करने में भी देर नहीं की। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि ईरान समझौते की मेज पर नहीं आता है और डील साइन नहीं करता है, तो अमेरिका के पास बमबारी फिर से शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में अमेरिका सामरिक रूप से बेहद मजबूत स्थिति में है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा
ईरान के लिए सबसे संवेदनशील क्षेत्र ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को लेकर ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अब अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण है। ट्रंप के अनुसार, ईरान के पास अब विकल्प सीमित हैं और उसे अपनी अर्थव्यवस्था और अस्तित्व को बचाने के लिए अमेरिका की शर्तों पर समझौता करना ही होगा। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका अब इस क्षेत्र में किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है और अपनी सैन्य उपस्थिति को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
सीजफायर का रणनीतिक उपयोग और सैन्य तैयारी
सीएनबीसी (CNBC) को दिए एक विशेष साक्षात्कार में ट्रंप ने पिछली सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले 47 वर्षों में जो काम अन्य राष्ट्रपतियों को करना चाहिए था, उसे पूरा करने का अवसर अब उन्हें मिला है। ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण खुलासा करते हुए कहा कि अमेरिका ने हालिया सीजफायर (युद्धविराम) का उपयोग अपनी सैन्य शक्ति को पुनर्गठित करने और ताकत बढ़ाने के लिए किया है। उन्होंने यह भी माना कि शायद ईरान ने भी इस समय का ऐसा ही उपयोग किया होगा, लेकिन अमेरिका अब पहले से कहीं अधिक तैयार और घातक स्थिति में है।
चीन की भूमिका और संदिग्ध जहाज की जब्ती
ट्रंप ने सोमवार, 20 अप्रैल को हुई एक घटना का जिक्र करते हुए अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हड़कंप मचा दिया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना ने एक संदिग्ध जहाज को पकड़ा है, जिसमें कुछ आपत्तिजनक सामग्री मिली है। ट्रंप ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा, “शायद यह चीन की तरफ से ईरान के लिए कोई ‘तोहफा’ था।” उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपने संबंधों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां समझौते की राह में बाधा बन सकती हैं। यह बयान दिखाता है कि ईरान के मुद्दे पर अमेरिका अब चीन की भूमिका पर भी पैनी नजर रख रहा है।
अंतिम चेतावनी: “एक-दो दिन में प्रगति नहीं हुई तो शुरू होगी बमबारी”
साक्षात्कार के अंत में जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या समझौते की दिशा में तत्काल प्रगति न होने पर सैन्य कार्रवाई फिर शुरू होगी, तो उनका जवाब बेहद सख्त था। ट्रंप ने बिना किसी झिझक के कहा, “मुझे उम्मीद है कि बमबारी होगी।” उन्होंने ईरान को ‘कॉमन सेंस’ का इस्तेमाल करने की सलाह दी और कहा कि वह एक समृद्ध राष्ट्र बन सकता है, लेकिन इसके लिए उसे अमेरिकी शर्तों पर डील करनी होगी। ट्रंप का यह रुख स्पष्ट करता है कि इस्लामाबाद में होने वाली आगामी वार्ता ईरान के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति जैसी होने वाली है।
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