Congress Reshuffle 2026 : कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को गति देने के लिए कई राज्यों के प्रभारियों में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने अलग-अलग राज्यों में वरिष्ठ नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इस फेरबदल के तहत सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी बनाया गया है। वहीं रणदीप सुरजेवाला को गुजरात का प्रभारी नियुक्त किया गया है। छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी सुखदेव भगत को दी गई है, जबकि भूपेश बघेल को असम का प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा श्रीवेल्ला प्रसाद को महाराष्ट्र और पीवी मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया है।
रणदीप सुरजेवाला को कर्नाटक की अतिरिक्त जिम्मेदारी
कांग्रेस ने संगठनात्मक बदलाव के तहत रणदीप सुरजेवाला को एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। गुजरात के प्रभारी बनाए जाने के साथ उन्हें कर्नाटक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। वहीं मुकुल वासनिक पार्टी के महासचिव पद पर बने रहेंगे। कांग्रेस के इस फेरबदल को आगामी चुनावों और राज्यों में संगठन को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने ऐसे समय में बदलाव किया है, जब कई राज्यों में चुनावी तैयारियां तेज होने वाली हैं।
राहुल गांधी के पंजाब दौरे से पहले बदला प्रभारी
सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी दिए जाने का फैसला राहुल गांधी के प्रस्तावित पंजाब दौरे से पहले हुआ है। इससे पहले भूपेश बघेल पंजाब कांग्रेस के प्रभारी की भूमिका निभा रहे थे। अब पार्टी ने उन्हें पंजाब से हटाकर असम का प्रभारी बना दिया है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और चुनावी तैयारियों को लेकर कांग्रेस पहले से ही संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय है। ऐसे में प्रभारी पद में बदलाव को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी बनी बड़ी चुनौती
पंजाब में संगठन को लेकर कांग्रेस के भीतर लंबे समय से खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। विधानसभा चुनाव की तैयारियों के दौरान भूपेश बघेल ने पंजाब का दौरा कर पार्टी संगठन और नेताओं के साथ बैठकें की थीं। हालांकि, इस दौरान पार्टी के भीतर गुटबाजी भी खुलकर सामने आई। कुछ नेताओं ने उनके नेतृत्व को लेकर असहमति जाहिर की थी। चरणजीत सिंह चन्नी से जुड़े गुट की ओर से भी बघेल के खिलाफ विरोध के स्वर सामने आए थे।
चन्नी गुट को साधने की रणनीति मानी जा रही
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस के विभिन्न गुटों को साथ लाने के उद्देश्य से पार्टी ने यह बदलाव किया है। भूपेश बघेल को हटाकर सचिन पायलट को जिम्मेदारी सौंपना कांग्रेस की नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है। पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग नेताओं और गुटों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की होगी। पार्टी उम्मीद कर रही होगी कि उनकी स्वीकार्यता संगठन में एकजुटता बढ़ाने में मदद करेगी।
बघेल की संगठन पर पकड़ से जुड़ी चुनौती
हालांकि, भूपेश बघेल के पास पंजाब संगठन को लेकर पिछले कुछ समय में काफी अनुभव और जानकारी जुट गई थी। उन्होंने विभिन्न जिलों के संगठन और स्थानीय नेताओं के साथ काम किया था। ऐसे में अचानक प्रभारी बदलने से चुनावी तैयारियों की गति और संगठनात्मक समीकरण पर असर पड़ने की संभावना भी जताई जा रही है। सचिन पायलट को नए सिरे से संगठन को समझना होगा और स्थानीय नेताओं के साथ मजबूत तालमेल बनाना होगा।
पायलट के सामने चुनाव से पहले बड़ी परीक्षा
पंजाब विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले सचिन पायलट को मिली यह जिम्मेदारी उनके लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा होगी। उन्हें न केवल पार्टी के संगठन को मजबूत करना होगा, बल्कि आंतरिक गुटबाजी को भी नियंत्रित करना होगा। साथ ही उम्मीदवारों, स्थानीय नेतृत्व और चुनावी रणनीति को लेकर सभी पक्षों के बीच सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण रहेगा। अब देखना होगा कि पायलट किस तरह पंजाब कांग्रेस को एकजुट करके आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को मजबूत स्थिति में पहुंचाते हैं।
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