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Congress Seemanchal Loss: ओवैसी फैक्टर ने डुबोई कांग्रेस! राहुल गांधी को क्यों ठहराया गया हार का जिम्मेदार?

Congress Seemanchal Loss: बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और महागठबंधन को मिली करारी हार के कारणों पर गहन मंथन और समीक्षा का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को दिल्ली में बिहार चुनाव हार चुके प्रत्याशियों के साथ एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद थे।

Congress Seemanchal Loss:आरोप-प्रत्यारोप नहीं, सिर्फ हार के कारण जानने पर जोर

सूत्रों के अनुसार, बैठक को प्रभावी बनाने के लिए राहुल गांधी ने प्रत्याशियों को 10-10 के समूहों में बांटकर उनसे बात की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि उन्हें “खींचतान, आरोप-प्रत्यारोप नहीं सुनने” हैं, बल्कि केवल हार के वास्तविक और ठोस कारण जानने हैं। राहुल गांधी ने नेताओं से सीधा सवाल किया कि “आप चुनाव क्यों हारे, यह बताइए।” इस सख्त रुख ने नेताओं को आत्मनिरीक्षण करने और संगठनात्मक कमियों को सामने लाने के लिए प्रेरित किया।

Congress Seemanchal Loss: सीमांचल में ओवैसी और BJP के नैरेटिव को ठहराया जिम्मेदार

पार्टी लीडरशिप के साथ बैठक के बाद कांग्रेस नेता अबिदुर रहमान ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी चुनाव के बाद हमेशा समीक्षा करती है और हमारे नेता ने भी वर्तमान स्थिति का गहन रिव्यू किया है। रहमान ने हार का एक बड़ा कारण सीमांचल क्षेत्र में ओवैसी फैक्टर को बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि एआईएमआईएम (AIMIM) नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ मिलकर एक ऐसा नैरेटिव (कथा) सेट किया, जिसका गहरा नकारात्मक असर न केवल सीमांचल पर, बल्कि बिहार के अन्य जिलों और इलाकों पर भी पड़ा। रहमान ने हालांकि यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी एक मजबूत विचारधारा वाली पार्टी है और वह इस हार से निराश नहीं है। उन्होंने विश्वास जताया कि राहुल गांधी और खरगे जी के नेतृत्व में पार्टी आगे बढ़ेगी और आने वाले दिनों में बेहतर प्रदर्शन करेगी।

टिकट वितरण में देरी और सरकारी लाभ भी बने हार की वजह

एक अन्य कांग्रेस नेता तौकीर आलम ने अपनी सीट पर हार की विशिष्ट वजहें बताईं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विधानसभा सीटों पर हार की वजहें भी अलग-अलग थीं। अपनी व्यक्तिगत हार का जिक्र करते हुए आलम ने कहा कि वह अपनी सीट पर तैयारी कर रहे थे, लेकिन उनका नाम आखिरी समय में बरारी सीट के लिए स्थानांतरित (ट्रांसफर) कर दिया गया। उन्होंने कहा कि अगर उनका नाम 10-15 दिन पहले घोषित हो गया होता, तो वह स्थिति को संभाल सकते थे।

तौकीर आलम ने बताया कि कम समय मिलने के बावजूद उन्हें सत्तानवे हज़ार लोगों का समर्थन मिला, लेकिन वह जीत नहीं पाए। उन्होंने हार की एक और बड़ी वजह का खुलासा किया: “आखिरी दिन तक उनके (महिलाओं के) अकाउंट में दस हज़ार रुपये जाते रहे, वो भी एक वजह थी।” उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से सरकारी योजनाओं के लाभ को चुनाव के अंतिम चरण में मतदाताओं को प्रभावित करने वाला एक कारक बताया।

AICC तैयार करेगी भविष्य का रोडमैप: कार्रवाई का आश्वासन

मीटिंग के बाद कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने बताया कि हर उम्मीदवार ने अपना व्यक्तिगत नजरिया और अनुभव पेश किया है। राहुल गांधी, खरगे और वेणुगोपाल ने उनकी शिकायतों को विस्तार से सुना है और सुधार के उपायों पर बात हुई है। सिंह ने विश्वास जताया कि सभी को उनके चुनाव क्षेत्र के हिसाब से सुना गया है और सुधार के कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नेतृत्व ने इसे सकारात्मक तरीके से लिया है और जल्द ही एक अच्छा रोडमैप बनेगा, ताकि कांग्रेस को दोबारा ऐसी हार का सामना न करना पड़े।

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि बहुत विस्तृत समीक्षा की गई है और दस-दस के समूह में नेतृत्व ने सबसे वन-ऑन-वन ​​(व्यक्तिगत रूप से) बात की है। उन्होंने कहा, “अब इस पूरी चर्चा के बाद AICC (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयार करेगी और कार्रवाई की जाएगी।”

“वोट चुराने का लीगल तरीका” और एक भोजपुरी गाना भी चर्चा में

बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने मीटिंग के बाद मीडिया से बात करते हुए एक बेहद गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सभी उम्मीदवारों ने एकमत से कहा कि वोट चुराने का एक कानूनी तरीका था। उनके अनुसार, “कोड ऑफ़ कंडक्ट लागू होने के बावजूद लोगों की वित्तीय मदद की गई।” उन्होंने यह भी कहा कि इंडिया अलायंस और खासकर कांग्रेस पार्टी के वोट शेयर में कोई कमी नहीं आई और यह हार मुख्य रूप से केंद्र सरकार की नीतियों के कारण हुई।

दिलचस्प बात यह है कि सूत्रों के मुताबिक, मीटिंग शुरू होने से पहले जब नेता आपस में बात कर रहे थे, तो कुछ नेताओं ने हार का एक गैर-राजनीतिक कारण भी बताया—एक भोजपुरी गाना: ‘मारेब सिक्सर के 6 गोली छाती में रे’। कुछ नेताओं का मानना था कि इस गाने ने चुनाव से ठीक पहले महागठबंधन के खिलाफ एक नकारात्मक माहौल बना दिया, जिससे उनकी हार हुई। नेतृत्व ने अब आंतरिक समीक्षा के बाद संगठन को नए सिरे से बनाने पर ध्यान केंद्रित करने का निश्चय किया है।

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