Cryopreservation Services : मौत के बाद फिर से ज़िंदा होने का सपना अब विज्ञान की कहानियों से निकलकर हकीकत बनने की ओर बढ़ रहा है। जर्मन स्टार्ट-अप कंपनी टुमारो बायो (Tomorrow Bio) ने एक ऐसी सेवा शुरू की है, जो मृत शरीर या मस्तिष्क को सुपर ठंडा करके फ्रीज कर भविष्य में पुनर्जीवन का वादा करती है। कंपनी का दावा है कि भविष्य में तकनीक इतनी विकसित होगी कि इन ‘फ्रीज’ शरीरों को पुनः जीवित किया जा सकेगा।

क्या है क्रायो-प्रिजर्वेशन?
क्रायो-प्रिजर्वेशन एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें मृत शरीर को मृत्यु के तुरंत बाद बेहद कम तापमान, लगभग माइनस 198 डिग्री सेल्सियस, पर रखा जाता है। इससे शरीर के टूटने और क्षय की प्रक्रिया पूरी तरह से रुक जाती है। इस तकनीक के जरिए शरीर या मस्तिष्क को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है ताकि भविष्य में, जब विज्ञान आगे बढ़ जाए, तो इन्हें पुनर्जीवित किया जा सके।

टुमारो बायो की फीस कितनी है?
कंपनी मृत शरीर को पूरी तरह फ्रीज करने के लिए करीब 1.8 करोड़ रुपये (लगभग 200,000 यूरो) चार्ज करती है। वहीं, केवल मस्तिष्क को क्रायो-प्रिजर्वेशन के लिए 67.2 लाख रुपये (लगभग 75,000 यूरो) फीस लगती है। यह प्रक्रिया यूरोप के विभिन्न शहरों से शुरू होकर स्विट्जरलैंड स्थित मुख्य केंद्र तक शरीर को ले जाकर पूरी की जाती है।
प्रक्रिया कैसी होती है?
मृत्यु के बाद तुरंत एक विशेष एम्बुलेंस शव को ठंडा करने वाले केंद्र तक ले जाती है। वहां शरीर को लिक्विड नाइट्रोजन से भरे हुए स्टील कंटेनर में रखा जाता है और लगभग दस दिनों तक माइनस 198 डिग्री तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है। यह तापमान शरीर की कोशिकाओं के क्षय को रोकता है।
कितने लोग जुड़े हैं?
अब तक टुमारो बायो ने छह लोगों और पांच पालतू जानवरों का क्रायो-प्रिजर्वेशन किया है। इसके अलावा, करीब 650 से अधिक लोग इस सेवा के लिए भुगतान कर चुके हैं और अपने फ्रीज होने का इंतजार कर रहे हैं। कंपनी का लक्ष्य है कि वे एक ऐसी दुनिया बनाएं, जहां इंसान अपनी ज़िंदगी की अवधि खुद चुन सकें।
क्या सच में संभव है पुनर्जीवन?
हालांकि यह तकनीक वैज्ञानिकों के लिए रोमांचक है, लेकिन इसे लेकर बहुत सवाल भी हैं। आज तक किसी के पुनर्जीवन का कोई प्रमाण नहीं मिला है। वर्तमान में क्रायो-प्रिजर्वेशन केवल एक ‘उम्मीद’ है कि भविष्य में चिकित्सा और तकनीक इतनी विकसित होगी कि मृत शरीर को पुनर्जीवित किया जा सके। विशेषज्ञ इस तकनीक को अभी ‘प्रयोगात्मक’ ही मानते हैं और इसे विज्ञान की कल्पना के करीब बताते हैं।
टुमारो बायो जैसी कंपनियां मौत के बाद ज़िंदगी को संभव बनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अभी यह सपना कितना सच होगा, यह भविष्य की बात है। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक यह सेवा महंगी और विवादित विज्ञान की दुनिया की एक दिलचस्प पहल बनी रहेगी।
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