Chhindwara Cough Syrup Deaths: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप के सेवन से अब तक 10 मासूमों की मौत हो चुकी है। ताजा घटनाक्रम में एक और बच्ची योगिता की किडनी फेल होने से मौत हो गई, जिसके बाद मृतकों की संख्या 10 हो गई है। बीते एक हफ्ते से नागपुर में इलाज चल रहा था, लेकिन बच्ची को बचाया नहीं जा सका। इस मानव निर्मित त्रासदी को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए हर मृत बच्चे के परिजनों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है।

कमलनाथ का दर्द और सरकार पर बड़ा आरोप
कमलनाथ ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा,”ज़हरीला कफ सिरप पीने से अब तक छिंदवाड़ा में 10 बच्चों की मौत हो चुकी है। यह महज दुर्घटना नहीं बल्कि मानव निर्मित त्रासदी है। मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। मैं मध्य प्रदेश सरकार से मांग करता हूं कि मृत बच्चों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।”उन्होंने यह भी कहा कि जिन बच्चों का इलाज अभी चल रहा है, उनके लिए सरकार इलाज का पूरा खर्च उठाए। कई परिवार इलाज के खर्च को लेकर आर्थिक संकट में हैं, जबकि सरकार की ओर से कोई सहायता नहीं मिल रही है।

जहरीले कफ सिरप की जांच में चौकाने वाला खुलासा
तमिलनाडु सरकार की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि इस विवादित ‘कोल्ड्रिफ कफ सिरप’ में जहरीले तत्व डीईजी (DEG – डाइएथिलीन ग्लाइकोल) की मात्रा नियम से कई गुना अधिक थी।
मध्य प्रदेश के स्टेट फूड एंड ड्रग कंट्रोलर दिनेश कुमार मौर्य ने बताया,”सिरप में 0.1% DEG की अनुमति है, लेकिन जांच में पाया गया कि कोल्ड्रिफ सिरप में 48.6% DEG था। इसलिए मध्य प्रदेश सरकार ने इस सिरप पर प्रतिबंध लगा दिया है। डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इसे न दें और जनता से भी अपील है कि इस कंपनी का सिरप न खरीदें।”
प्रदेश में सिरप की सप्लाई और जांच जारी
कोल्ड्रिफ सिरप का सैंपल तमिलनाडु की लैब में भेजा गया था, जहां से रिपोर्ट आने के बाद तत्काल मध्य प्रदेश सरकार ने सिरप पर बैन लगा दिया।सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए छिंदवाड़ा में लोकल सप्लाई चैन की जांच शुरू कर दी है। साथ ही प्रदेशभर के संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर जांच-पड़ताल तेज करने को कहा गया है।
नकली दवाओं पर कड़ा कदम और सतर्कता की जरूरत
कमलनाथ ने सरकार से आग्रह किया है कि राज्य में नकली और जहरीली दवाओं के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाए ताकि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो। उन्होंने कहा,”सरकार को दवाओं की बिक्री पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानना होगा।” छिंदवाड़ा कफ सिरप मामला न केवल एक बड़ी स्वास्थ्य त्रासदी है, बल्कि यह एक चेतावनी भी है कि स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और सुरक्षा पर सरकार और संबंधित एजेंसियों को कड़ा ध्यान देना होगा। बच्चों की जान जोखिम में डालने वाली यह घटना तुरंत प्रभावी कार्रवाई और जवाबदेही की मांग करती है।











