Chhattisgarh Politics : छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य में खाद-बीज की किल्लत और सूखे जैसे हालातों को लेकर सरकार को घेरा। बघेल ने स्थगन प्रस्ताव के जरिए आरोप लगाया कि प्रदेश के किसान खाद की भारी कमी से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी दुकानों में खाद उपलब्ध नहीं है, जबकि निजी बाजारों में वही खाद ऊंचे दामों पर बिक रहा है। उनके अनुसार, 1300 रुपये का डीएपी बाजार में 1800 से 2000 रुपये तक मिल रहा है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी दावा किया कि किसानों को प्रति एकड़ खाद की मात्रा सीमित करने और जबरन एनपीके (NPK) खाद थमाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

बुवाई में पिछड़ती खेती और अल नीनो का साया
पूर्व मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि प्रदेश में अवर्षा के कारण कृषि कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उन्होंने सरगुजा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अब तक मात्र 18 प्रतिशत ही बुवाई हो पाई है, और बस्तर व मैदानी इलाकों में भी खेती पिछड़ गई है। बघेल ने कहा कि बीच में कुछ दिन बारिश हुई, लेकिन जमीन अब फिर सूख चुकी है और उसमें दरारें पड़ने लगी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अल नीनो का प्रभाव स्पष्ट दिख रहा है और सरकार इस गंभीर कृषि संकट पर चर्चा कराने के लिए तैयार नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने बीज की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई स्थानों पर अमानक बीज मिले हैं, जिन्हें वापस करना पड़ा है।

सरकार ने दावों को नकारा: कृषि मंत्री रामविचार नेताम का पक्ष
विपक्ष के इन तीखे आरोपों का जवाब देते हुए कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने सभी दावों को निराधार और बेबुनियाद बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने खाद और बीज की समस्या को गंभीरता से लिया है और विपक्ष केवल किसानों को गुमराह करने के लिए ऐसा कर रहा है। मंत्री नेताम ने बताया कि चुनौतियों के बावजूद सरकार ने प्रदेश में 50 प्रतिशत से अधिक खाद का भंडारण सुनिश्चित किया है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने किसानों के लिए नैनो डीएपी और नैनो यूरिया को बेहतर विकल्प के रूप में उपलब्ध कराया है, ताकि खाद की कमी का असर खेती पर न पड़े।
विपक्ष का वॉकआउट और बढ़ता राजनीतिक तनाव
सदन में चर्चा के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। जहां पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर किसानों की अनदेखी और कृषि नीति में विफलता का आरोप लगाया, वहीं कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए है और किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। हंगामे और सरकार द्वारा चर्चा के स्वरूप पर असहमति के चलते विपक्ष ने सदन की कार्यवाही के दौरान अपना विरोध दर्ज कराया। यह मुद्दा अब राज्य की राजनीति में बड़ी बहस का केंद्र बन गया है, जहां एक ओर सत्ता पक्ष अपनी तैयारियों का बखान कर रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष किसानों की समस्याओं को लेकर सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन की राह पर है।












