Delhi Building Collapse : दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। राहत और बचाव अभियान के दौरान देर रात मलबे से एक और शव बरामद किया गया। हादसे के बाद से घटनास्थल पर लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। भारी मलबे के नीचे किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की आशंका को देखते हुए बचाव दल बेहद सावधानी से मलबा हटाकर तलाश कर रहे हैं।
NDRF और दिल्ली पुलिस का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
हादसे के बाद एनडीआरएफ (NDRF), दिल्ली फायर सर्विस और दिल्ली पुलिस की टीमें मौके पर मौजूद हैं। बचावकर्मी युद्धस्तर पर अभियान चलाकर कंक्रीट और भारी स्लैब को हटाने में जुटे हैं। मलबे की स्थिति जटिल होने के कारण रेस्क्यू टीमों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। किसी संभावित व्यक्ति की मौजूदगी का पता लगाने के लिए विशेष उपकरणों के साथ डॉग स्क्वॉड की भी मदद ली जा रही है।
इलाके की घेराबंदी कर सुरक्षा बढ़ाई गई
इमारत गिरने के बाद आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। घटनास्थल की घेराबंदी कर आम लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया है, ताकि राहत एवं बचाव अभियान में किसी तरह की बाधा न आए। बचाव दल मलबे के हर हिस्से की जांच कर यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि कोई व्यक्ति अंदर फंसा न रह गया हो।
हादसे ने PG और हॉस्टल की सुरक्षा पर उठाए सवाल
सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों में संचालित पेइंग गेस्ट (PG) और हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र और युवा किराए के कमरों या हॉस्टलों में रहते हैं। ऐसे में भवनों की मजबूती, निर्माण मानकों, फायर सेफ्टी और अनुमति से जुड़े नियमों के पालन को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
पूर्व मुख्य सचिव ओमेश सहगल ने जताई चिंता
दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव ओमेश सहगल ने इस घटना को गंभीर चेतावनी बताया है। उन्होंने कहा कि सत्य निकेतन हादसे को केवल एक अलग घटना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका दावा है कि दिल्ली के कई हिस्सों में बड़ी संख्या में इमारतें अनधिकृत हैं। उन्होंने कहा कि कुछ भवन बिना स्वीकृत नक्शे के बनाए गए हैं, जबकि कई जगह बाद में अतिरिक्त मंजिलें जोड़ दी गईं या निर्माण में खराब गुणवत्ता वाली सामग्री के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती हैं।
भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा ऑडिट की मांग
ओमेश सहगल ने सुझाव दिया कि जिन इलाकों में पहले से अत्यधिक भीड़ और ओवर-कंस्ट्रक्शन है, वहां नए निर्माण और भवन नक्शों की मंजूरी पर तत्काल रोक लगाने पर विचार होना चाहिए। साथ ही, पुराने और संवेदनशील भवनों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराया जाना चाहिए। इससे कमजोर इमारतों की पहचान कर समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
छात्रों की सुरक्षा को लेकर सियासत तेज
हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कांग्रेस नेता कुमारी सैलजा ने बीजेपी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि माता-पिता बेहतर भविष्य की उम्मीद में अपने बच्चों को दिल्ली भेजते हैं। ऐसे में राजधानी में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है, यह स्पष्ट होना चाहिए।
NSUI ने राहत व्यवस्था पर उठाए सवाल
एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने घटनास्थल का दौरा कर राहत एवं बचाव व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मेडिकल टीमें, दमकल विभाग और प्रशासन पूरी तैयारी के साथ समय पर पहुंचते, तो संभव है कि कुछ और लोगों की जान बचाई जा सकती थी। उनके बयान के बाद हादसे को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
बीजेपी युवा मोर्चा ने राजनीति से बचने की अपील की
दिल्ली भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष रजत चौधरी ने हादसे को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह समय राजनीति करने का नहीं है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होने और मलबे में फंसे संभावित लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकालने पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से संवेदनशीलता बरतने का आग्रह किया।
अनधिकृत निर्माण पर कार्रवाई की चुनौती
सत्य निकेतन हादसे ने राजधानी में भवन सुरक्षा और अनधिकृत निर्माण की निगरानी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों की तलाश और पीड़ितों को राहत पहुंचाना है। इसके बाद प्रशासन के सामने यह चुनौती होगी कि हादसे के कारणों की जांच के साथ-साथ असुरक्षित इमारतों और नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कैसे सुनिश्चित की जाए।
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