NEET Paper Leak: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG 2026) प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसी ने विशेष अदालत में दाखिल अपनी चार्जशीट में कई अहम डिजिटल और तकनीकी सबूत पेश किए हैं। इन सबूतों के आधार पर सीबीआई ने दावा किया है कि परीक्षा प्रक्रिया में सेंध लगाने के लिए एक सुनियोजित नेटवर्क काम कर रहा था।सीबीआई की चार्जशीट में सबसे महत्वपूर्ण सबूत पुणे की एक रिहायशी सोसाइटी का एक्सेस कंट्रोल ऐप रिकॉर्ड बताया गया है। इस ऐप में सोसाइटी में आने-जाने वाले लोगों की डिजिटल जानकारी दर्ज होती है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इसी रिकॉर्ड से पता चला कि परीक्षा से पहले कई अभ्यर्थी और उनके परिजन एनटीए विशेषज्ञ पी. वी. कुलकर्णी के संपर्क में थे।

परीक्षा से पहले आरोपी विशेषज्ञ के घर पहुंचे थे अभ्यर्थी
सीबीआई के अनुसार, 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा से कुछ दिन पहले अप्रैल महीने में कई उम्मीदवार और उनके परिवार के सदस्य पुणे स्थित कुलकर्णी के आवास पर पहुंचे थे। सोसाइटी के डिजिटल रिकॉर्ड में इन लोगों की एंट्री दर्ज मिली है।जांच एजेंसी ने बताया कि कुलकर्णी के मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और लोकेशन डेटा की जांच में भी यह पुष्टि हुई कि उस समय वह अपने घर पर मौजूद थे। सीबीआई का दावा है कि डिजिटल साक्ष्यों से उम्मीदवारों और आरोपी विशेषज्ञ के बीच सीधा संपर्क स्थापित होता है।

तीन एनटीए विशेषज्ञों को बनाया गया मुख्य आरोपी
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े तीन विषय विशेषज्ञों को मुख्य आरोपी बनाया है। इनमें रसायन विज्ञान विशेषज्ञ पी. वी. कुलकर्णी, जीव विज्ञान विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मांढरे और भौतिकी विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार शामिल हैं।जांच एजेंसी का आरोप है कि इन विशेषज्ञों ने आर्थिक लाभ के लिए परीक्षा प्रश्नपत्र तैयार करने की सुरक्षित प्रक्रिया का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने प्रश्नपत्र निर्माण प्रणाली की कमजोरियों का फायदा उठाकर गोपनीय जानकारी बाहर पहुंचाई।
सुरक्षित परिसर से प्रश्न बाहर निकालने का आरोप
चार्जशीट के अनुसार, ओखला स्थित सुरक्षित परिसर में प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान पी. वी. कुलकर्णी ने कथित तौर पर प्रश्नों को छोटे कागजों पर लिखकर या याद करके बाहर निकाला।सीबीआई का आरोप है कि कुलकर्णी बाद में होटल पहुंचकर इन प्रश्नों को दोबारा लिखते थे। इसके बाद इन्हीं प्रश्नों को आगे बेचने के लिए एक संगठित नेटवर्क के माध्यम से भेजा गया।
बिचौलियों के जरिए राजस्थान और हरियाणा तक पहुंचा पेपर
जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र लीक करने के बाद इसे कई बिचौलियों के जरिए अलग-अलग राज्यों तक पहुंचाया गया। सीबीआई के मुताबिक, ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे और कोचिंग संचालक शिवराज मुटगावकर जैसे लोगों ने इस नेटवर्क में अहम भूमिका निभाई।आरोप है कि इन लोगों के माध्यम से लीक हुए प्रश्न राजस्थान और हरियाणा तक भेजे गए, जहां कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले कथित रूप से प्रश्न उपलब्ध कराए गए।

विशेषज्ञ समिति ने प्रश्नों के मिलान में की पुष्टि
सीबीआई ने जब अभ्यर्थियों से बरामद सामग्री की जांच कराई तो इसे दिल्ली विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ समिति के पास भेजा गया। समिति ने प्रश्नों का मिलान करने के बाद पाया कि कई सेटों में बड़ी संख्या में वही प्रश्न मौजूद थे, जो कथित तौर पर आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए थे।जांच रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रश्न सेटों में लगभग 85 प्रतिशत तक समानता पाई गई। इससे सीबीआई का दावा और मजबूत हुआ कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले में संगठित तरीके से काम किया गया।
परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
सीबीआई की विस्तृत चार्जशीट ने NEET-UG परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ी की पूरी कड़ी को सामने रखा है। डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और बरामद दस्तावेजों को जांच का प्रमुख आधार बनाया गया है।अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई अदालत की निगरानी में होगी। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है और आने वाले समय में और खुलासे हो सकते हैं।
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