Vande Mataram 2026: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर इस बार लाल किले में होने वाला समारोह कई मायनों में खास रहने वाला है। 15 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार 13वीं बार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे और इसके बाद देश को संबोधित करेंगे। समारोह में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। हालांकि, इस बार सबसे बड़ा आकर्षण राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति होगी। पहली बार स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में लाल किले की प्राचीर से वंदे मातरम गूंजेगा।

पीएम मोदी के संबोधन से पहले होगी प्रस्तुति
रक्षा मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ का गायन किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। अब तक इस आधिकारिक कार्यक्रम में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को ही प्रमुख स्थान दिया जाता था। इस बार राष्ट्रीय गीत को भी समारोह का हिस्सा बनाया गया है।

आखिर अब तक क्यों नहीं गाया जाता था वंदे मातरम?
लाल किले पर होने वाले आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में अब तक राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के तहत राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को प्राथमिकता दी जाती थी। ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद इसे मुख्य ध्वजारोहण समारोह में नियमित रूप से शामिल नहीं किया गया था। इसके पीछे ऐतिहासिक और धार्मिक संवेदनशीलताओं से जुड़ी परिस्थितियां महत्वपूर्ण कारण मानी जाती हैं।
1937 में वंदे मातरम के शुरुआती दो छंद चुने गए
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंद मातृभूमि की स्तुति करते हैं। हालांकि, इसके आगे के छंदों में देवी दुर्गा और अन्य हिंदू धार्मिक प्रतीकों से जुड़े संदर्भ आते हैं। इन संदर्भों को लेकर मुस्लिम लीग समेत कुछ पक्षों ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद 1937 में कांग्रेस ने सार्वजनिक आयोजनों में शुरुआती दो छंदों के इस्तेमाल को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया था।
गांधी और टैगोर की सलाह का भी रहा प्रभाव
ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह को ध्यान में रखते हुए वंदे मातरम के शुरुआती दो छंदों को सार्वजनिक मंचों पर इस्तेमाल करने का निर्णय लिया गया। उद्देश्य यह था कि राष्ट्रीय आंदोलन और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान बना रहे। इसी वजह से गीत के धार्मिक संदर्भ वाले बाद के हिस्सों को आधिकारिक सार्वजनिक प्रस्तुतियों से अलग रखा गया।

1950 में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत का दर्जा
देश की आजादी के बाद 1950 में संविधान सभा ने ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया। वहीं ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंदों को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया। इस व्यवस्था के जरिए दोनों को राष्ट्रीय महत्व और सम्मान प्रदान किया गया। हालांकि सरकारी प्रोटोकॉल में राष्ट्रगान की भूमिका अलग रही और स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में उसी को प्रमुखता मिलती रही।
अब बदलेगा स्वतंत्रता दिवस समारोह का प्रोटोकॉल
2026 के स्वतंत्रता दिवस पर इस परंपरा में बदलाव देखने को मिलेगा। इस बार प्रधानमंत्री के भाषण से पहले लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति होगी। इसके साथ ही राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ भी समारोह का हिस्सा रहेगा। यानी इस ऐतिहासिक आयोजन में राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान दोनों को स्थान दिया जाएगा।
कानून में संशोधन के बाद मिला नया कानूनी आधार
इस बदलाव के पीछे जुलाई 2026 में संसद से पारित Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 का भी उल्लेख किया जा रहा है। दिए गए विवरण के अनुसार, संशोधन के जरिए ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालना अपमान की श्रेणी में आ सकता है और इसे दंडनीय बनाया गया है।
1971 के कानून में किया गया संशोधन
राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मूल कानून Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 में राष्ट्रगान से संबंधित प्रावधान पहले से मौजूद थे। अब संशोधन के जरिए ‘वंदे मातरम’ को भी इसके दायरे में शामिल किया गया है। ऐसे में 15 अगस्त 2026 का लाल किले का समारोह केवल स्वतंत्रता दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गीत से जुड़े प्रोटोकॉल और कानूनी व्यवस्था में बदलाव का प्रतीक भी माना जा रहा है।
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