Delhi SIR : दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विवाद लगातार चर्चा में है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को यमुना किनारे स्थित बेला एस्टेट का दौरा किया और वहां रहने वाले लोगों से मुलाकात की। उन्होंने दावा किया कि SIR के बाद इलाके से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में दिखाई नहीं दे रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बेला एस्टेट से जुड़े एक मतदान क्षेत्र में पहले 729 मतदाता दर्ज थे, जबकि 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची में सिर्फ एक नाम बचा।
राहुल गांधी ने 727 नाम हटने का दावा किया
राहुल गांधी ने स्थानीय लोगों से बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। इसमें उन्होंने कहा कि बेला एस्टेट में रहने वाले लोगों में से बड़ी संख्या के नाम SIR के बाद मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। उन्होंने दावा किया कि यहां रहने वाले लोग लंबे समय से इलाके में रह रहे हैं और पहले के चुनावों में मतदान भी कर चुके हैं। राहुल गांधी ने कहा कि वर्ष 2023 में उनके मकान हटाए गए थे, लेकिन इसके बावजूद लोग इलाके में बने हुए हैं।
प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठाए गए सवाल
राहुल गांधी ने अपने दौरे के दौरान स्थानीय अधिकारियों से भी बातचीत की। उन्होंने एक SDM से फोन पर बात करते हुए मतदाता के वोट देने के अधिकार और आवास की स्थिति को अलग-अलग विषय बताया। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति के पास पक्का मकान है या नहीं, इससे उसके मताधिकार का निर्धारण नहीं होना चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के पुराने बयानों का हवाला देते हुए बेघर लोगों के लिए मतदाता सूची में घर नंबर से जुड़ी व्यवस्था का भी उल्लेख किया।
राहुल गांधी ने SIR पर लगाया गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के माध्यम से उन लोगों के नाम प्रभावित हुए हैं, जिनके पास पहले से ही सीमित संसाधन हैं। राहुल गांधी ने इसे “वोट चोरी” का तरीका बताया और कहा कि चुनाव आयोग तथा उससे जुड़े तंत्र को इस मामले का जवाब देना चाहिए। ये राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर अंतिम स्थिति संबंधित चुनावी प्रक्रिया और आधिकारिक जांच से स्पष्ट होगी।
चुनाव अधिकारियों ने नाम हटने की वजह बताई
बेला एस्टेट मामले में चुनाव अधिकारियों की ओर से बताया गया है कि इलाके की भौतिक और आवासीय स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में बदलाव आया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों ने कहा कि वहां पुराने मकान हटाए जा चुके हैं और SIR के दौरान दर्ज पते पर कई मतदाता सामान्य निवासी के रूप में नहीं मिले। ऐसे मतदाताओं के नाम ASDD यानी Absent, Shifted, Dead और Duplicate जैसी श्रेणियों में शामिल किए गए।
ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होने पर दावा करने का विकल्प
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट के मुताबिक, 31 अगस्त 2026 को SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। जिन पात्र मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट रोल में नहीं है, वे निर्धारित दावे और आपत्ति अवधि में Form-6 के जरिए नाम शामिल कराने का आवेदन कर सकते हैं। आधिकारिक वेबसाइट पर ASDD सूची भी उपलब्ध कराई गई है, जहां मतदाता अपने नाम और नाम शामिल न होने से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं।
दिल्ली में SIR को लेकर व्यापक बहस जारी
बेला एस्टेट का मामला दिल्ली में SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम बाहर होने को लेकर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा है। विभिन्न इलाकों के मतदाताओं ने भी ड्राफ्ट सूची में अपने नाम नहीं मिलने को लेकर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग की प्रक्रिया में दावा और आपत्ति दर्ज कराने की व्यवस्था मौजूद है, जिसके जरिए पात्र मतदाता अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
अंतिम सूची से पहले दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया अहम
दिल्ली में SIR की प्रक्रिया अभी अंतिम चरण तक नहीं पहुंची है। CEO दिल्ली के अनुसार पात्र मतदाताओं के लिए ड्राफ्ट सूची में नाम की जांच करने और जरूरत पड़ने पर दावा दाखिल करने की व्यवस्था जारी है। ऐसे में बेला एस्टेट के मतदाताओं के नामों को लेकर उठे सवालों का अंतिम आकलन दावा-आपत्ति प्रक्रिया और अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद अधिक स्पष्ट होगा।
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