NCRB Report 2023: भारत सरकार के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने वर्ष 2023 की अपराध रिपोर्ट जारी कर दी है, जिसमें देशभर में दर्ज अपराधों की स्थिति, प्रवृत्ति और राज्यवार विश्लेषण पेश किया गया है। रिपोर्ट के आंकड़े कई मामलों में चौंकाने वाले हैं, खासतौर पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों, साइबर अपराध और आर्थिक अपराधों के क्षेत्र में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है।

दिल्ली महिलाओं के लिए अब भी सबसे असुरक्षित
रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में दिल्ली देश के सभी प्रमुख शहरों में पहले स्थान पर बनी हुई है। 2023 में दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ 13,366 मामले दर्ज किए गए, जबकि मुंबई में 6,025 और बेंगलुरु में 4,870 मामले दर्ज हुए। हालांकि, 2022 के मुकाबले दिल्ली में ऐसे मामलों में 5.7% की गिरावट आई है – 2022 में यह आंकड़ा 14,247 था। इन अपराधों में बलात्कार, छेड़छाड़, घरेलू हिंसा और दहेज हत्या जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में दिल्ली का आंकड़ा देश के अन्य बड़े शहरों से दोगुने से भी अधिक है, जो राजधानी की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

साइबर और आर्थिक अपराधों में जबरदस्त उछाल
NCRB रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में देशभर में साइबर क्राइम के 86,420 मामले दर्ज किए गए हैं, जो 2022 के 65,893 मामलों की तुलना में 31.2% अधिक है। ये अपराध मुख्यतः ऑनलाइन ठगी, डेटा चोरी, हैकिंग और साइबर स्टॉकिंग जैसे मामलों से जुड़े थे। इसके अलावा, आर्थिक अपराध भी तेजी से बढ़े हैं। 2023 में कुल 2,04,973 आर्थिक अपराध दर्ज हुए, जो 2022 के मुकाबले 6% ज्यादा हैं। रिपोर्ट बताती है कि इनमें से 69% मामले सिर्फ धोखाधड़ी से जुड़े हुए हैं, जो देश में बढ़ती आर्थिक असुरक्षा और डिजिटल फ्रॉड को दर्शाते हैं।
ओवरऑल क्राइम में कर्नाटक सबसे ऊपर
अगर समग्र अपराधों की बात की जाए तो कर्नाटक सबसे ऊपर है। 2023 में यहां 21,889 अपराध दर्ज हुए। इसके बाद तेलंगाना में 18,236 और उत्तर प्रदेश में 10,794 मामले सामने आए हैं। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि दक्षिण भारत के राज्य, विशेष रूप से कर्नाटक और तेलंगाना, डिजिटल और आर्थिक अपराधों के केंद्र बनते जा रहे हैं।
क्या कहती है रिपोर्ट?
NCRB की रिपोर्ट न केवल अपराध के आंकड़े प्रस्तुत करती है, बल्कि यह भी बताती है कि कानून व्यवस्था और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में किस तरह के सुधार की आवश्यकता है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध में गिरावट भले दिख रही हो, लेकिन यह अब भी चिंता का विषय बना हुआ है।
देश में अपराध के बदलते ट्रेंड – खासकर साइबर और आर्थिक अपराधों की बढ़ती दर – साफ इशारा करते हैं कि हमें सिर्फ पारंपरिक पुलिसिंग नहीं, बल्कि डिजिटल और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी रूप से सशक्त सुरक्षा प्रणाली की भी आवश्यकता है। वहीं महिलाओं की सुरक्षा के लिए संवेदनशील और तेज न्याय प्रणाली की मांग और भी प्रासंगिक हो गई है।











