Dhamtari Farmers Protest : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में सोमवार को किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने खाद की भारी किल्लत और अपनी 12 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारी किसानों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी जायज मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तेज करेंगे तथा पूरे जिले में चक्काजाम करने को मजबूर होंगे। किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन के इस महत्वपूर्ण समय में खाद न मिलने के कारण फसलों के उत्पादन पर बेहद बुरा असर पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में किसानों के सामने भुखमरी का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

कलेक्ट्रेट के बाहर भारी पुलिस बल
इस बड़े विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व छत्तीसगढ़ किसान यूनियन संघ द्वारा किया गया। जिले भर से आए किसान हाथों में बैनर, पोस्टर और तख्तियां लेकर रैली की शक्ल में कलेक्ट्रेट पहुंचे। आंदोलन की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर रखा था ताकि किसानों को भीतर प्रवेश करने से रोका जा सके। कलेक्ट्रेट के बाहर ही धरने पर बैठे संघ के पदाधिकारियों और किसानों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने मांग की है कि सहकारी समितियों और किसान राइस मिलों में तत्काल प्रभाव से खाद की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

समितियों में खाद का अकाल
छत्तीसगढ़ किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष घनाराम साहू ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने बताया कि इस समय किसानों को सोसाइटियों और किसान राइस मिलों के चक्कर काटने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। वर्तमान स्थिति यह है कि समितियों में किसानों को एक बोरा डीएपी (DAP) और एक बोरा यूरिया तक नसीब नहीं हो रहा है। सबसे ज्यादा मार आधा एकड़ या 99 डेसिमल वाले छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ रही है, जिन्हें खाद देने से पूरी तरह मना कर दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब निजी व्यापारियों के पास ऊंचे दामों पर बेचने के लिए पर्याप्त खाद है, तो सरकारी सोसाइटियों में यह व्यवस्था क्यों ठप पड़ी है?
कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग
यूनियन के जिला अध्यक्ष साहू ने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा कि प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि छोटे और बड़े सभी किसानों को सोसाइटियों और किसान राइस मिलों के माध्यम से पहले की तरह खाद की सुचारू उपलब्धता मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि खुले बाजार में व्यापारी इस संकट का फायदा उठा रहे हैं और 600 से 700 रुपए प्रति बोरी के हिसाब से खाद बेचकर अवैध मुनाफा कमा रहे हैं। किसानों ने इस कृत्रिम संकट और कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसानों का आर्थिक शोषण बंद नहीं हुआ, तो पूरा जिला उग्र आंदोलन की आग में झुलसने को तैयार रहे।
देश के उत्पादन पर पड़ेगा बुरा असर
किसान यूनियन संघ के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने इस संकट के दूरगामी परिणामों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि देश की एक बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था कृषि पर टिकी हुई है। यदि फसल की बुआई और विकास के समय ही खेतों को सही मात्रा में यूरिया और डीएपी नहीं मिला, तो कुल कृषि उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। विद्रोही ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर खाद का कृत्रिम अभाव पैदा कर रही है ताकि बड़े कॉरपोरेट्स और निजी डीलरों को फायदा पहुंचाया जा सके। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो देश में खाद्यान्न संकट के साथ किसानों के घरों में भुखमरी की स्थिति निर्मित हो जाएगी।
सरकारी योजनाओं पर संकट
अपने संबोधन के अंत में तेजराम विद्रोही ने सरकार की लोक-लुभावन नीतियों पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब देश में अनाज का उत्पादन ही घट जाएगा, तो सरकार की ओर से गरीबों को दी जाने वाली 5 किलो मुफ्त राशन की महत्वाकांक्षी व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा जाएगी। उन्होंने सत्तासीन दलों पर आरोप लगाया कि सरकार मुफ्त राशन के नाम पर केवल अपना वोट बैंक मजबूत करने की राजनीति में व्यस्त है, लेकिन जो अन्नदाता इस राशन की नींव है, उसकी बुनियादी जरूरतों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उत्पादन कम होने की दशा में यह मुफ्त राशन की व्यवस्था लंबे समय तक नहीं टिक पाएगी।
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