Korba Land Mafia : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। मुड़ापार क्षेत्र में स्थित अंबेडकर भवन के पास नगर पालिक निगम के स्वामित्व वाली कई एकड़ बेशकीमती सरकारी जमीन पर भूमाफियाओं द्वारा अवैध कब्जा किया जा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रशासन द्वारा ‘ग्रीन जोन’ के रूप में चिन्हित की गई इस सुरक्षित भूमि पर खड़े दर्जनों हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काटा जा रहा है। पर्यावरण को ताक पर रखकर इस पूरी जमीन पर अवैध प्लाटिंग का धंधा धड़ल्ले से फल-फूल रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है।

स्थानीय नागरिकों का फूटा गुस्सा
मुड़ापार के स्थानीय निवासियों ने इस अवैध कारोबार का कड़ा विरोध करते हुए पूरे मामले का खुलासा किया है। नागरिकों के अनुसार, अंबेडकर भवन से बिल्कुल सटी हुई यह सरकारी जमीन शहर के फेफड़ों के समान थी, जिसे ग्रीन जोन घोषित किया गया था। लेकिन पिछले कुछ दिनों से यहां दिन-रात पेड़ों की कटाई की जा रही है। पेड़ों को साफ करने के बाद भारी मशीनों से जमीन को समतल किया जा रहा है। भूमाफियाओं ने यहां बाकायदा टेंट और तिरपाल लगाकर अपना अस्थायी ठिकाना बना लिया है और वे भोले-भाले लोगों को झांसा देकर अवैध रूप से प्लॉट की नाप-जोख और बुकिंग कर रहे हैं।

निगम कर्मचारी पर गंभीर आरोप
इस पूरे जमीन घोटाले में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब स्थानीय लोगों ने नगर निगम के ही एक कर्मचारी मनोज बक्सेल की संलिप्तता का पर्दाफाश किया। ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों का सीधा आरोप है कि इस अवैध प्लाटिंग को नगर निगम के इसी कर्मचारी का पूरा संरक्षण प्राप्त है। रक्षक ही भक्षक बन बैठा है और उसने खुद इसी सुरक्षित शासकीय ग्रीन जोन की भूमि पर अतिक्रमण करके अपना एक आलीशान मकान खड़ा कर लिया है। लोगों का कहना है कि जब तक विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत रहेगी, तब तक सरकारी संपत्तियों को भूमाफियाओं के चंगुल से बचा पाना नामुमकिन है।
प्रशासन के दोहरे रवैये पर सवाल
स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली और उनकी मंशा पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का आरोप है कि ग्रीन जोन में अवैध निर्माण की लगातार शिकायतें मिलने के बाद नगर निगम की टीम ने दिखावे के लिए मौके पर एक जेसीबी (JCB) मशीन भेजी थी। इस दिखावे की कार्रवाई के दौरान आस-पास के कुछ छोटे-मोटे अस्थायी कब्जों को तो हटाया गया, लेकिन रसूखदार निगम कर्मचारी मनोज बक्सेल के अवैध मकान पर पीला पंजा नहीं चलाया गया और टीम बैरंग लौट आई। प्रशासन के इस दोहरे रवैये से नाराज नागरिकों ने अब बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
कार्रवाई का खोखला दावा
शिकायत का दौर बढ़ने पर नगर निगम के अधिकारियों की एक विशेष टीम ने दोबारा मौका मुआयना किया और क्षेत्रवासियों को कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। हालांकि, जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल जुदा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अफसरों के आश्वासन के बावजूद मौके पर अवैध प्लाटिंग का काम एक घंटे के लिए भी नहीं रुका है। पेड़ काटने का सिलसिला बदस्तूर जारी है और जमीन की नपाई कर उसे बेचने का खेल खुलेआम चल रहा है। निगम की ढीली कार्रवाई के कारण भूमाफियाओं के हौसले पूरी तरह बुलंद हैं और वे किसी भी कानून को मानने को तैयार नहीं हैं।
जोन कमिश्नर पवन वर्मा का बयान
इस पूरे संवेदनशील मामले पर जब नगर पालिक निगम के जोन कमिश्नर पवन वर्मा से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मुड़ापार ग्रीन जोन में अवैध कब्जे और अवैध प्लाटिंग की लिखित शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि शिकायत मिलते ही निगम की टीम ने मौके पर जाकर प्रारंभिक कार्रवाई की है और वहां अवैध रूप से निर्माण करने वाले अन्य लोगों को बेदखली का कानूनी नोटिस जारी किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि निगम कर्मचारी की संलिप्तता और उसके द्वारा बनाए गए अवैध मकान के आरोपों की उच्च स्तरीय विभागीय जांच कराई जाएगी और दोष सिद्ध होने पर उसे नौकरी से बर्खास्त करने के साथ ही कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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