Dhamtari News: धमतरी जिले के गौरव और समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित ‘सार्थक स्कूल’ के होनहार विशेष खिलाड़ी सत्यांशु दीप ने वैश्विक पटल पर भारत का मान बढ़ाया है। स्वीडन के गोथेनबर्ग में संपन्न हुए प्रतिष्ठित ‘स्पेशल ओलंपिक्स गोथिया कप-2026’ में सत्यांशु ने अपनी अद्भुत खेल प्रतिभा का परिचय दिया। भारतीय स्पेशल ओलंपिक्स फुटबॉल टीम के अभिन्न अंग के रूप में खेलते हुए, उन्होंने टीम को कांस्य पदक (ब्रॉन्ज मेडल) दिलाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तीसरे स्थान के लिए हुए रोमांचक मुकाबले में भारतीय टीम ने फिनलैंड को 2-1 के अंतर से पराजित कर यह शानदार जीत हासिल की। उनकी इस सफलता से छत्तीसगढ़ सहित संपूर्ण भारत का मस्तक गर्व से ऊँचा हो गया है।

प्रतिभा और अदम्य हौसले की मिसाल
सत्यांशु की यह उपलब्धि यह सिद्ध करती है कि शारीरिक दिव्यांगता कभी भी सच्ची प्रतिभा और बुलंद इरादों के मार्ग में बाधा नहीं बनती। उनकी सफलता के बाद धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि एक विशेष खिलाड़ी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना पूरे जिले के लिए अत्यंत गौरव और प्रेरणा का विषय है। कलेक्टर ने कहा कि सत्यांशु ने अपने अनुशासन, कठिन परिश्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। उनकी यह यात्रा इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को उचित मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और निरंतर अभ्यास का अवसर मिले, तो वे विश्व स्तर पर अपनी छाप छोड़ने की क्षमता रखते हैं।

प्रेरणास्रोत बने सत्यांशु, परिवार और शिक्षकों को श्रेय
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने सत्यांशु के साथ-साथ उनके माता-पिता, परिवार के सदस्यों, प्रशिक्षकों, सार्थक स्कूल और ‘स्पेशल ओलंपिक्स भारत-छत्तीसगढ़’ की पूरी टीम को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सत्यांशु आने वाले समय में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में धमतरी, छत्तीसगढ़ और भारत का नाम रोशन करना जारी रखेंगे। वहीं, समाज कल्याण विभाग की उप संचालक डॉ. मनीषा पांडे ने सत्यांशु की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी जीत राज्य के अन्य विशेष बच्चों के लिए एक नई उम्मीद और प्रेरणा का स्रोत बनी है। उन्होंने कहा कि यह सफलता सामूहिक प्रयासों, नियमित प्रशिक्षण और अटूट आत्मविश्वास का परिणाम है।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं सत्यांशु
सत्यांशु दीप केवल फुटबॉल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एक बहुमुखी खिलाड़ी हैं। स्वीडन में मिली इस अंतरराष्ट्रीय ख्याति से पूर्व भी उन्होंने अपनी खेल दक्षता का लोहा मनवाया है। हरियाणा के रोहतक में आयोजित ‘राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप’ में उन्होंने देश के 23 राज्यों से आए 500 से अधिक खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए लॉन्ग जंप (लंबी कूद) में स्वर्ण पदक और 100 मीटर दौड़ में कांस्य पदक अपने नाम किया था। उनकी इसी निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन भारतीय स्पेशल ओलंपिक्स फुटबॉल टीम में हुआ था। स्वीडन में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर उन्होंने न केवल स्वयं को साबित किया, बल्कि धमतरी जैसे छोटे जिले को वैश्विक पहचान भी दिलाई है। उनकी कहानी समाज में समावेशी विकास और सकारात्मक दृष्टिकोण को और अधिक सशक्त बनाती है।
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