Surajpur News: पहली बारिश में टूटी गोबरी नदी की पुलिया, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

Surajpur News:  सूरजपुर जिले में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एक बार फिर विवादों के घेरे में है। गोबरी नदी पर लाखों रुपये की लागत से निर्मित अस्थायी रपटा पुल मानसून की पहली ही बारिश की मार नहीं झेल सका और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हैरानी की बात यह है कि इस रपटा का निर्माण कार्य महज एक महीने पहले ही पूरा किया गया था। इतनी कम अवधि में पुल का ढह जाना सीधे तौर पर निर्माण कार्य में बरती गई भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। इस घटना ने क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है और निर्माण कार्य की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

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दर्जनों गांवों का टूटा मुख्य मार्ग से संपर्क

गोबरी नदी पर पूर्व में बना पुराना पुल ढह जाने के बाद, स्थानीय निवासियों की आवाजाही को सुगम बनाने के उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च कर यह अस्थायी पुल तैयार किया गया था। लेकिन पहली तेज बारिश ने निर्माण की गुणवत्ता की पोल खोल दी है। पुल के कई महत्वपूर्ण हिस्से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिसके कारण इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूर्णतः ठप हो गया है। इस पुलिया के टूटने से डबरीपारा, बासापारा, शिवप्रसाद नगर समेत दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से टूट गया है, जिससे ग्रामीण पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गए हैं।

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ग्रामीणों का आक्रोश और सख्त कार्रवाई की मांग

स्थानीय निवासी दीपक का कहना है कि पुल के निर्माण में गुणवत्ता मानकों का रत्ती भर भी ध्यान नहीं रखा गया, जिसका खामियाजा आज पूरा क्षेत्र भुगत रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि संवेदकों और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिसके कारण पहली ही बारिश में यह निर्माण ताश के पत्तों की तरह ढह गया। अब स्थिति यह है कि स्कूली बच्चे, बीमार व्यक्ति और किसान अपने दैनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं। आक्रोशित ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।

प्रशासन की चुप्पी और सुचारू आवागमन की चुनौती

वर्तमान में पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आम जनता के लिए आवाजाही का संकट बढ़ गया है, जिसे देखते हुए अब सभी की निगाहें प्रशासन की ओर टिकी हैं। ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि आखिर इतने कम समय में निर्मित पुल कैसे टूट गया और इसके लिए जवाबदेह कौन है? प्रशासन के समक्ष अब दोहरी चुनौती है—पहली, तत्काल युद्धस्तर पर पुल की मरम्मत कर यातायात को सुचारू करना, और दूसरी, निर्माण कार्य में हुई कथित धांधली की जांच कर दोषियों को बेनकाब करना। यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो ग्रामीणों का यह आक्रोश किसी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

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Chandan Das

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