Dhirendra Shastri : बागेश्वर धाम सरकार और प्रसिद्ध कथावाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनकी कथावाचन नहीं, बल्कि उनका रिसर्च के क्षेत्र में कदम रखने की इच्छा है। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने “भूतों पर पीएचडी” करने की बात कही, जिससे हर कोई चौंक गया। लेकिन क्या सच में भूत-प्रेत, आत्मा और अलौकिक शक्तियों पर पीएचडी की जा सकती है? आइए जानते हैं कि दुनियाभर में इस विषय पर कहां-कहां और किस तरह पढ़ाई होती है।

क्या है मामला?
धीरेंद्र शास्त्री का मानना है कि भूत-प्रेत और अदृश्य शक्तियां केवल अंधविश्वास नहीं हैं, बल्कि इन पर वैज्ञानिक नजरिए से शोध की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह विषय सिर्फ धर्म या तंत्र से नहीं जुड़ा है, बल्कि सामाजिक और मानसिक दृष्टिकोण से भी इसका अध्ययन जरूरी है।

क्या भारत में होती है ऐसी पढ़ाई?
भारत में वर्तमान समय में भूत-प्रेत या पैरानॉर्मल स्टडी पर कोई मान्यता प्राप्त पीएचडी प्रोग्राम नहीं है। हालांकि कुछ निजी संस्थान या रिसर्च स्कॉलर इस क्षेत्र में व्यक्तिगत शोध कर सकते हैं, लेकिन इसे विश्वविद्यालय स्तर पर अब तक आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है।
कहां-कहां होता है अलौकिक घटनाओं पर अध्ययन?
1. एडिनबरा यूनिवर्सिटी, स्कॉटलैंड
यह विश्वविद्यालय Koestler Parapsychology Unit के माध्यम से पिछले 50 वर्षों से पैरानॉर्मल स्टडीज और परासाइकोलॉजी पर रिसर्च कर रहा है।
यहां निम्नलिखित विषयों पर अध्ययन किया जाता है:
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भूत-प्रेत के अनुभव
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शरीर से बाहर जाने के अनुभव (Out-of-Body Experiences)
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साइकिक एबिलिटी (Psychic Abilities)
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ड्रीम स्टडी
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मानसिक और अलौकिक शक्तियों का विश्लेषण
2. University of Virginia, USA
यहां Division of Perceptual Studies (DOPS) के तहत मृत्यु के बाद जीवन, आत्मा और पुनर्जन्म पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शोध किया जाता है।
सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी होता है अध्ययन
अगर कोई भूत-प्रेत को एक सांस्कृतिक या सामाजिक विश्वास के रूप में देखता है, तो उसके लिए Cultural Anthropology एक बेहतर विषय हो सकता है। इसमें अध्ययन किया जाता है कि कैसे अलग-अलग समाज अलौकिक घटनाओं को समझते हैं और उनसे जुड़े रीति-रिवाज और मान्यताओं को अपनाते हैं।
ये यूनिवर्सिटीज कराती हैं कल्चरल एंथ्रोपोलॉजी के कोर्स:
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Harvard University
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University of Oxford
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University of Cambridge
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Stanford University
भले ही भारत में भूतों पर पीएचडी का कोई सीधा कोर्स उपलब्ध नहीं है, लेकिन दुनिया के कुछ प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय इस विषय को गंभीरता से लेते हैं। पंडित धीरेंद्र शास्त्री की यह पहल भले ही अजीब लगे, लेकिन अगर इसे वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो यह शोध का एक अनछुआ और रोचक क्षेत्र हो सकता है।










