Rodrigo Duterte ICC: अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते के खिलाफ मानवता विरोधी अपराधों (Crimes Against Humanity) का गंभीर आरोप लगाया है। सोमवार को जारी की गई 15 पन्नों की चार्जशीट में दावा किया गया है कि दुतेर्ते की जानकारी और मंजूरी से कम से कम 76 लोगों की हत्याएं की गईं, जिनमें से कई हत्याएं उनके मेयर और राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान हुईं।

क्या हैं आरोप?
ICC की चार्जशीट के अनुसार, दुतेर्ते पर तीन मुख्य आरोप लगाए गए हैं:

2013 से 2016: जब वह दावाओ सिटी के मेयर थे, उस दौरान 19 टारगेटेड हत्याएं।
2016 से 2017: राष्ट्रपति बनने के बाद 14 टारगेटेड हत्याएं।
2016 से 2018: ड्रग्स के खिलाफ चलाए गए कथित ‘क्लियरेंस ऑपरेशंस’ के दौरान 43 हत्याएं।
इन घटनाओं को राज्य प्रायोजित हत्याएं माना जा रहा है। चार्जशीट में कहा गया है कि दुतेर्ते ने पुलिस और सुरक्षा बलों को अपराधियों, विशेष रूप से ड्रग्स के संदिग्धों, के खिलाफ हिंसा और हत्या की खुली छूट दी थी।
राष्ट्रपति रहते दिए थे खुलेआम हिंसा के आदेश
चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि दुतेर्ते ने कई बार सार्वजनिक मंचों से पुलिस को आदेश दिए कि जो संदिग्ध गिरफ्तारी का विरोध करें, उन्हें गोली मार दी जाए। उन्होंने खुले तौर पर कहा था कि ड्रग्स के व्यापारियों को “खत्म कर देना चाहिए”, जिससे पुलिस कार्रवाई का दायरा हिंसक होता गया।
गिरफ्तारी और वर्तमान स्थिति
मार्च 2025 में फिलीपींस सरकार ने ICC के वारंट के आधार पर दुतेर्ते को गिरफ्तार किया और उन्हें नीदरलैंड्स स्थित हेग में ICC हिरासत केंद्र भेजा गया। वह फिलहाल वहीं कैद हैं और मुकदमे की सुनवाई का सामना कर रहे हैं।
विवाद और विरोध
दुतेर्ते के खिलाफ ICC की कार्रवाई से फिलीपींस में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। उनके समर्थकों और कुछ राजनीतिक दलों ने मौजूदा राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर की सरकार की आलोचना की है। उनका कहना है कि फिलीपींस ICC का सदस्य नहीं है, इसलिए यह गिरफ्तारी गैरकानूनी है।
गौरतलब है कि फिलीपींस ने 2019 में ICC की सदस्यता छोड़ दी थी, लेकिन ICC का तर्क है कि जिन घटनाओं की जांच की जा रही है, वे उससे पहले की हैं, इसलिए न्यायालय का अधिकार क्षेत्र अब भी लागू होता है।रोड्रिगो दुतेर्ते की गिरफ्तारी और ICC की चार्जशीट ने न केवल फिलीपींस की राजनीति को झकझोर दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों की रक्षा को लेकर नई बहस भी शुरू कर दी है। अब सभी की नजरें ICC की अगली सुनवाई और फैसले पर टिकी हैं।
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