Trump 200% Drug Tariff Plan: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी आक्रामक ट्रेड पॉलिसी को लेकर सुर्खियों में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन दवाओं पर 200% तक टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है। इससे पहले वह ऑटो, स्टील और अन्य आयातित वस्तुओं पर भारी शुल्क लगा चुके हैं। अब फार्मास्युटिकल सेक्टर को निशाना बनाए जाने की आशंका है।

क्या है ट्रंप की दलील?
ट्रंप इस टैरिफ प्रस्ताव के पीछे 1962 के ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट के सेक्शन 232 का हवाला दे रहे हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर आयात पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान अमेरिका ने दवाओं की भारी कमी और जमाखोरी का सामना किया, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ाना अब रणनीतिक रूप से जरूरी हो गया है।

किसे पड़ेगा असर?
अमेरिका के अंदर:
अमेरिका में बिकने वाली 92% दवाएं जेनेरिक होती हैं, जिनका उत्पादन मुख्य रूप से भारत और चीन जैसे देशों से होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जेनेरिक दवाएं कम मुनाफे पर बिकती हैं, इसलिए 200% टैरिफ लगने पर ये कंपनियां अमेरिकी बाजार छोड़ सकती हैं। इससे अमेरिकी नागरिकों को दवाएं महंगे दामों पर खरीदनी पड़ सकती हैं, और हेल्थकेयर सिस्टम पर व्यापक असर होगा।
भारत पर असर:
भारत दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक दवाओं का निर्यातक है। अमेरिका, भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए सबसे बड़ा बाजार है। ऐसे में 200% टैरिफ से भारत की फार्मा इंडस्ट्री को बड़ा झटका लग सकता है। एक्सपोर्ट घटने, मुनाफा कम होने और नौकरियों पर असर पड़ने की आशंका है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
फार्मा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ट्रंप के “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे का हिस्सा है, लेकिन इसका उल्टा असर हो सकता है। जहां एक ओर यह घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करेगा, वहीं दूसरी ओर इससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होगी और अमेरिकी नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं की लागत में वृद्धि झेलनी पड़ेगी।
किन दवाओं पर पड़ेगा सीधा असर?
हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की जेनेरिक दवाएं
एंटीबायोटिक्स
कैंसर और हार्ट डिजीज की दवाएं
इम्यूनोथेरेपी आधारित ट्रीटमेंट
फार्मा API (Active Pharmaceutical Ingredient)
क्या कहती है इंडस्ट्री?
फार्मा लॉबी और मेडिकल एक्सपर्ट्स ट्रंप को खत का जवाब दे रहे हैं, जिसमें कहा गया है कि इस तरह का टैरिफ नीति न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि घरेलू दवा संकट भी खड़ा कर सकती है।
वैश्विक स्तर पर गूंज सकता है ट्रंप का फैसला
डोनाल्ड ट्रंप की दवा पर 200% टैरिफ लगाने की योजना, केवल व्यापारिक नीति नहीं, बल्कि यह वैश्विक हेल्थकेयर सिस्टम के लिए एक खतरनाक संकेत बन सकती है। भारत सहित कई विकासशील देशों के लिए यह आर्थिक और रणनीतिक चुनौती बन सकता है। आने वाले समय में यह मुद्दा अमेरिकी चुनावों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंचों पर भी गर्माया जा सकता है।
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