Dussehra 2025: छत्तीसगढ़ में आज गुरुवार को दशहरा पर्व बड़े ही हर्ष और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को विजयदशमी की शुभकामनाएं दीं और कहा कि “सत्य और धर्म की विजय निश्चित है।”

मुख्यमंत्री ने विजयदशमी के अवसर पर ट्वीट कर लिखा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें यह शिक्षा देता है कि अत्याचार चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म ही विजय प्राप्त करते हैं। श्रीराम ने संघर्षों का सामना संकल्प और साहस के साथ करके जो आदर्श स्थापित किया, उसी से प्रेरणा लेते हुए आज बस्तर की धरती पर नया इतिहास लिखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अन्याय और अत्याचार की कितनी भी विकराल छाया क्यों न हो, धर्म की ज्योति उसे भस्म कर देती है।

साय ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ की सरकार नक्सलवाद रूपी रावण का अंत कर रही है। यह दशहरा केवल उत्सव नहीं, बल्कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में संकल्प लेने का अवसर है।
गांधी और शास्त्री को दी श्रद्धांजलि
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राजधानी रायपुर के आजाद चौक स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा और शास्त्री चौक पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने महात्मा गांधी के स्वच्छता और अहिंसा के सिद्धांतों को याद करते हुए कहा कि गांधी जी ने भारत को स्वतंत्रता की नई दिशा दी।
मुख्यमंत्री ने लाल बहादुर शास्त्री के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन सत्य, सादगी और अनुशासन का प्रतीक था। शास्त्री जी ने “जय जवान-जय किसान” के नारे के माध्यम से देश को आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर किया और किसानों व सेनाओं को राष्ट्र की असली ताकत बताया।
जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी
इस अवसर पर विधायक पुरन्दर मिश्रा, रायपुर महापौर मीनल चौबे, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव और अन्य जनप्रतिनिधिगण भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का माहौल उल्लास और आस्था से भरा हुआ था।
दशहरा पर्व पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह संदेश छत्तीसगढ़ में न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य की राजनीतिक और सामाजिक प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। यह पर्व समाज को सत्य, साहस और अनुशासन के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है, जो आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक है।











