DUSU Election 2026 : दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ यानी DUSU चुनाव को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान कथित हंगामे और अदालत के निर्देशों के उल्लंघन पर कड़ी नाराजगी जताई है। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि चुनावी प्रक्रिया के दौरान नियमों और न्यायिक आदेशों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो चुनाव रद्द करने का कदम भी उठाया जा सकता है।
कोर्ट ने दी चुनाव रद्द करने की चेतावनी
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि यदि उसे यह भरोसा नहीं हुआ कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा नहीं होंगी, तो DUSU चुनाव पूरी तरह रद्द किए जा सकते हैं। कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया में अनुशासन और न्यायिक आदेशों के पालन को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की।
‘इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं’
सुनवाई के दौरान पीठ ने कथित घटनाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अब बहुत हो चुका है। अदालत ने आपराधिक व्यवहार, लापरवाही और कथित गुंडागर्दी जैसी गतिविधियों को लेकर सख्त टिप्पणी की। पीठ ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं हर साल सामने आती हैं और चुनावी प्रक्रिया के दौरान ऐसे आचरण को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
तस्वीरों को लेकर अधिकारियों से सवाल
दिल्ली हाई कोर्ट ने अधिकारियों से कथित उल्लंघनों से जुड़ी तस्वीरों के बारे में भी सवाल किए। अदालत ने पूछा कि क्या संबंधित अधिकारियों ने तस्वीरों को देखा है। पीठ ने तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि यदि न्यायालय के आदेशों के बावजूद ऐसी गतिविधियां हुई हैं, तो यह आदेशों के स्पष्ट उल्लंघन का मामला हो सकता है।
दिल्ली विश्वविद्यालय ने कोर्ट को दी जानकारी
सुनवाई के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता मोहिंदर रूपल अदालत के सामने पेश हुए। उन्होंने बताया कि DUSU चुनाव का प्रचार अभियान बुधवार को समाप्त हो गया है। विश्वविद्यालय की ओर से दी गई जानकारी के बाद अदालत ने कथित उल्लंघनों से जुड़ी तस्वीरों और चुनाव प्रचार के दौरान सामने आई गतिविधियों को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा।
हर साल सामने आने वाली घटनाओं पर चिंता
पीठ ने सुनवाई के दौरान यह भी टिप्पणी की कि छात्रसंघ चुनाव के दौरान इस तरह की घटनाएं हर वर्ष सामने आती रही हैं। अदालत के रुख से स्पष्ट है कि वह चुनावी प्रक्रिया में अनुशासन बनाए रखने और अदालत के निर्देशों के पालन को लेकर गंभीर है। कोर्ट ने संकेत दिया कि नियमों का उल्लंघन जारी रहने पर चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
चुनाव रद्द करने का अधिकार जताया
अदालत ने कहा कि यदि वह इस बात से संतुष्ट नहीं होती कि भविष्य में कथित गुंडागर्दी या नियमों का उल्लंघन नहीं होगा, तो चुनाव रद्द किए जा सकते हैं। साथ ही अदालत ने संकेत दिया कि चुनाव की अनुमति तभी दी जाएगी, जब संबंधित पक्षों और अधिकारियों से यह भरोसा मिले कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी।
18 सितंबर को होना है मतदान
DUSU चुनाव की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मतदान 18 सितंबर को होना है। छात्र मतदाता अपने प्रतिनिधियों के चुनाव के लिए मतदान करेंगे। इसके बाद 19 सितंबर को वोटों की गिनती की जाएगी। चुनाव से पहले हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ा दी है।
अब अधिकारियों की भूमिका अहम
हाई कोर्ट की चेतावनी के बाद अब दिल्ली विश्वविद्यालय और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के सामने चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित कराने की चुनौती है। अदालत ने जिस तरह कथित उल्लंघनों पर नाराजगी जताई है, उससे संकेत मिलता है कि चुनाव के दौरान किसी भी नियम-विरोधी गतिविधि को गंभीरता से लिया जा सकता है। मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पर भी सभी की नजर रहेगी।
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