Economic Survey 2025-26
Economic Survey 2025-26: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया। इस आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में भारत की वास्तविक जीडीपी (GDP) वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा न केवल भारत की मजबूत आर्थिक नींव को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश की स्थिर विकास यात्रा की पुष्टि भी करता है। सर्वेक्षण में स्पष्ट किया गया है कि हाल के वर्षों में किए गए साहसी नीतिगत सुधारों के कारण देश की मध्यम अवधि की विकास क्षमता अब 7 प्रतिशत के स्तर को छू रही है।
आर्थिक समीक्षा में इस बात पर जोर दिया गया है कि वर्तमान में आर्थिक वृद्धि से जुड़े जोखिम काफी हद तक संतुलित हैं। इसका मुख्य श्रेय घरेलू मांग में मजबूती और सरकार द्वारा अपनाई गई वृहद आर्थिक स्थिरता (Macro-economic stability) की नीतियों को जाता है। सर्वे के अनुसार, सप्लाई चेन में निरंतर सुधार और जीएसटी (GST) दरों के युक्तिकरण से महंगाई पर लगाम कसने में मदद मिली है। आने वाले समय में उपभोक्ताओं को कीमतों के मोर्चे पर और राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि सरकार का मानना है कि मुद्रास्फीति अब नियंत्रण में रहने की ओर अग्रसर है।
1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से ठीक पहले आया यह सर्वेक्षण सरकार की भावी नीतिगत प्राथमिकताओं का एक महत्वपूर्ण संकेत है। इसमें पिछले एक साल के सरकारी कामकाज का विस्तृत आकलन किया गया है। यह सर्वे केवल पिछले वर्ष का रिपोर्ट कार्ड नहीं है, बल्कि यह भविष्य के सूक्ष्म आर्थिक प्रबंधन (Micro-economic management) के लिए एक ब्लूप्रिंट की तरह काम करता है। वैश्विक मंदी और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, यह रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत अपनी आंतरिक क्षमताओं के दम पर तेजी से उभर रहा है।
इस साल के सर्वेक्षण की सबसे बड़ी उपलब्धि इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में देखी गई अभूतपूर्व प्रगति है। वित्त वर्ष 2022 तक यह निर्यात की सातवीं सबसे बड़ी श्रेणी थी, लेकिन 2025 तक यह छलांग लगाकर तीसरे स्थान पर पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में ही इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 22.2 बिलियन डॉलर के स्तर को पार कर चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस गति से यह सेक्टर बढ़ रहा है, वह जल्द ही भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बन जाएगा, जो देश के विदेशी मुद्रा भंडार को और मजबूती प्रदान करेगा।
‘मेक इन इंडिया’ पहल की सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण मोबाइल फोन निर्माण क्षेत्र है। सर्वेक्षण के आंकड़े चौंकाने वाले हैं: वित्त वर्ष 2015 में मोबाइल फोन का उत्पादन मात्र 18,000 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025 तक बढ़कर 5.45 लाख करोड़ रुपये के विशाल स्तर पर पहुंच गया है। यह लगभग 30 गुना की वृद्धि है। मोबाइल फोन अब न केवल घरेलू मांग को पूरा कर रहे हैं, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी भारत की धाक जमा रहे हैं। यह सफलता भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में आए क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक है।
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