ED Raids Kalpana Financial Services : शेयर बाजार और ऑनलाइन ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा कमाने का सपना दिखाकर आम लोगों से करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी करने वाली कंपनी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने 4 नवंबर 2026 को ओडिशा और पश्चिम बंगाल में एक साथ 10 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई करीब 120 करोड़ रुपये की निवेश धोखाधड़ी से जुड़े मामले में की गई है। जांच के दायरे में कल्पना फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक अमित मंडल से जुड़े परिसर शामिल हैं।
कल्पना फाइनेंशियल सर्विसेज पर क्यों हुई छापेमारी?
ED की यह कार्रवाई आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। इसी एफआईआर के आधार पर केंद्रीय एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में कंपनी पर अनधिकृत निवेश योजनाएं संचालित करने और लोगों को शेयर बाजार में निवेश के नाम पर आकर्षक रिटर्न का लालच देने के आरोप सामने आए हैं।

हर महीने 3.5 से 7 प्रतिशत रिटर्न का दिया लालच
जांच एजेंसी के अनुसार, कल्पना फाइनेंशियल सर्विसेज कथित तौर पर लोगों को शेयर बाजार और हाई-रिटर्न ट्रेडिंग में निवेश करने के लिए प्रेरित करती थी। कंपनी की ओर से निवेशकों को उनकी जमा पूंजी पर हर महीने 3.5 प्रतिशत से लेकर 7 प्रतिशत तक निश्चित रिटर्न देने का वादा किया जाता था। अधिक मुनाफे और नियमित कमाई के इस आकर्षक ऑफर ने बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया।

जीवनभर की कमाई निवेश कर बैठे लोग
बताया जा रहा है कि कंपनी की कथित निवेश योजना में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई जमा कराई थी। निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब करीब 120 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला जांच के घेरे में है। ED यह पता लगाने में जुटी है कि कंपनी ने निवेशकों से कितनी रकम जुटाई और इस पूरी व्यवस्था में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच
छापेमारी के दौरान ED की टीमें कंपनी से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों, बैंक खातों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। जांच एजेंसी का मुख्य उद्देश्य निवेशकों से जुटाई गई रकम के वास्तविक स्रोत और उसके इस्तेमाल का पता लगाना है। इसके लिए संदिग्ध लेनदेन और पैसों के ट्रांसफर से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

बेनामी संपत्तियों और मनी ट्रेल पर ED की नजर
ED यह भी जांच कर रही है कि कथित तौर पर जुटाए गए 120 करोड़ रुपये किन-किन बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। एजेंसी को यह पता लगाना है कि कहीं निवेशकों की रकम को दूसरे खातों के माध्यम से छिपाने या बेनामी संपत्तियां खरीदने में तो इस्तेमाल नहीं किया गया। ओडिशा, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में खरीदी गई संभावित अचल संपत्तियां भी जांच के दायरे में हैं।
आगे बढ़ सकती है जब्ती और कानूनी कार्रवाई
फिलहाल ED की जांच जारी है। छापेमारी में मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यदि जांच में मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो संबंधित संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई भी हो सकती है। अब जांच एजेंसी की नजर इस बात पर है कि निवेशकों की रकम आखिर कहां पहुंची और इस कथित आर्थिक अपराध में कौन-कौन शामिल है।

